पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की मुश्किलें अभी कम होती नहीं दिख रही हैं और शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और अदालत ने साफ कहा कि फिलहाल इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है और इससे भुल्लर को बड़ा झटका लगा और अब उन्हें राहत के लिए इंतजार करना होगा
क्या कोर्ट ने कोई छूट भी दी?
सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह रास्ता बंद नहीं किया और भुल्लर को यह छूट दी कि अगर दो महीने के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है तो वह फिर से पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट जा सकते हैं और वहां से जमानत की कोशिश कर सकते हैं और इस तरह कोर्ट ने एक सीमित विकल्प जरूर खुला रखा है
क्या हाईकोर्ट पहले ही याचिका खारिज कर चुका था?
इससे पहले भुल्लर ने फरवरी में हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी लेकिन हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था और इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उम्मीद थी कि वहां से राहत मिल सकती है लेकिन अब वहां से भी निराशा हाथ लगी
क्या वकील ने दी थी मजबूत दलील?
भुल्लर की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अब उनके फरार होने का कोई खतरा नहीं है और इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए लेकिन अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई
क्या रिश्वत के आरोप गंभीर हैं?
सीबीआई के मुताबिक यह मामला अक्टूबर 2025 का है जब भुल्लर रोपड़ रेंज में डीआईजी थे और उन पर आरोप है कि उन्होंने एक निजी व्यक्ति के जरिए रिश्वत की मांग की थी ताकि एक एफआईआर में राहत दिलाई जा सके और कारोबारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई न हो
क्या ट्रैप में पकड़ा गया था बिचौलिया?
जांच एजेंसी ने 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ में ट्रैप लगाया था और एक बिचौलिए को पांच लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था और इसके बाद जांच आगे बढ़ी और भुल्लर को भी गिरफ्तार कर लिया गया और मामला मजबूत होता चला गया
क्या सबूतों के आधार पर विरोध हुआ?
सीबीआई ने अदालत में जमानत का कड़ा विरोध किया और कहा कि रिकॉर्डेड बातचीत व्हाट्सएप डेटा और कॉल डिटेल्स से आरोप पहली नजर में साबित होते हैं और इसी वजह से अदालत ने राहत नहीं दी और पहले भी निचली अदालत और हाईकोर्ट उनकी याचिका खारिज कर चुके हैं

























