बालीवुड न्यूज. शंकर महादेवन ने बताया कि जब ‘कजरा रे’ गाना रिकॉर्ड हो रहा था तो अमिताभ बच्चन का हिस्सा बाद में रिकॉर्ड होना था। उस समय जावेद अली ने अभिषेक बच्चन वाला हिस्सा गाया था और अमिताभ जी का हिस्सा शंकर ने रफ वॉइस में गा दिया था। बाद में एक इवेंट में शंकर की मुलाकात अमिताभ से हुई तो उन्होंने उनसे विनती की कि वे स्टूडियो आकर अपना हिस्सा रिकॉर्ड कर दें। शंकर ने बस यही बात मजाक भरे अंदाज़ में सुनाई जो आगे एक यादगार किस्सा बन गई।
अमिताभ ने क्या कहा था शंकर को?
जब शंकर ने अमिताभ से कहा कि उनका हिस्सा बाकी है तो अमिताभ ने हंसते हुए उनसे पूछा कि कौन सा गाना। जब शंकर ने ‘कजरा रे’ का नाम बताया तो अमिताभ ने कहा कि उन्होंने सुना है कि शंकर ने ही उनके लिए वॉइस रिकॉर्ड कर दी है। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए शंकर से कहा कि “ऐसा कुछ मत बदलना, नहीं तो मैं तुम्हारा करियर खत्म कर दूंगा।” यह बात मजाक में कही गई थी, लेकिन इस मजाक में बहुत अपनापन और प्यार भी था जो शंकर आज तक नहीं भूले।
उसी दिन कुछ खास हुआ था?
शंकर ने बताया कि उसी समय अमिताभ ‘रॉक एंड रोल’ की शूटिंग कर रहे थे। जब त्यांनी गाना सुना तो उन्हें इतना पसंद आया कि शंकर की काफी भारी बॉडी होने के बावजूद अमिताभ ने उन्हें पकड़कर उठा लिया और खुशी से गले लगा लिया। अमिताभ की यह खुशी और प्यार देखकर शंकर के लिए वह पल हमेशा के लिए दिल में बस गया। वह कहते हैं कि वह दिन उनके लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं था।
‘कजरा रे’ ने क्यों मचाई थी धूम?
‘कजरा रे’ फिल्म ‘बंटी और बबली’ का एक बड़ा हिट गाना था जिसने रिलीज़ होते ही पूरे देश में तहलका मचा दिया था। ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन और अमिताभ बच्चन की स्क्रीन केमिस्ट्री, वैभवी मर्चेंट की कोरियोग्राफी और शंकर-एहसान-लॉय का संगीत इस गाने को अलग पहचान देता है। गीत में कव्वाली और लोक-कजरी की झलक ने इसे और खास बनाया था। आज भी यह गाना शादी, पार्टी और स्टेज शो में खूब बजता है।
इस गाने की टीम में कौन थे?
इस सुपरहिट गाने में संगीत दिया था शंकर-एहसान-लॉय की त्रिकोण टीम ने जो हमेशा कुछ नया और अलग संगीत पेश करने के लिए जानी जाती है। इसके बोल लिखे थे मशहूर गीतकार गुलज़ार ने जिनके शब्दों में मिठास और गहराई दोनों होती है। जावेद अली की मिठी आवाज़ ने गाने को और निखार दिया था। जबकि अमिताभ और अभिषेक की एनर्जी ने स्क्रीन पर जान डाल दी थी। यह गाना टीमवर्क की एक बेहतरीन मिसाल माना जाता है।
क्यों याद रह गया यह किस्सा?
शंकर महादेवन कहते हैं कि अमिताभ बच्चन का यह मजाक सिर्फ मजाक नहीं था बल्कि यह एक तरह का प्यार और अपनापन था। जिस सहजता, सरलता और हास्य भावना के साथ अमिताभ ने यह बात कही, उसने उस पल को बेहद खास बना दिया। शंकर आज भी उस पल को याद करके मुस्करा देते हैं क्योंकि वह महसूस करते हैं कि उन्हें इंडस्ट्री में इतने बड़े कलाकार का सम्मान और स्नेह मिला।
आज भी है इस याद की गर्माहट
आज भले ही साल बदल गए हों और नए गाने आते रहे हों, लेकिन ‘कजरा रे’ और उससे जुड़ा यह किस्सा आज भी उतना ही ताज़ा है। शंकर कहते हैं कि कुछ पल ज़िंदगी भर के लिए दिल में जगह बना लेते हैं और यह उनमें से एक है। ऐसा प्यार और पहचान हर कलाकार को नसीब नहीं होती। यह कहानी बताती है कि फिल्म इंडस्ट्री में रिश्ते सिर्फ पेशेवर नहीं, दिल से भी जुड़े होते हैं।

























