हैल्थ न्यूज. गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं पर वायु प्रदूषण का गंभीर प्रभाव हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाएं वायु प्रदूषण के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होती हैं। प्रदूषक प्लेसेंटा में प्रवेश कर सकते हैं और भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे प्रीक्लेम्पसिया और कम वजन वाले शिशु के जन्म जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह न केवल सांस से जुड़ी समस्याएं पैदा करता है, बल्कि महिलाओं के दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है, खासकर उनके प्रजनन और हृदय स्वास्थ्य पर।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
उच्च स्तर के वायु प्रदूषण के संपर्क में आने वाली गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा होता है। इनमें मातृ उच्च रक्तचाप, प्रसवोत्तर अवसाद, प्लेसेंटल एब्रप्शन, शिशु का कम वजन, समय से पहले जन्म, नवजात शिशु मृत्यु दर, फेफड़ों और श्वसन संबंधी समस्याएं और गर्भपात जैसी गंभीर स्थितियां शामिल हैं। इन समस्याओं से बचाव के लिए महिलाओं को खास सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
पर्यावरण और प्रजनन स्वास्थ्य का संबंध
विश्व की 99% आबादी ऐसे वायु प्रदूषण के संपर्क में है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों से अधिक है। महिलाएं जैविक, सामाजिक और जीवनशैली के कारणों से इस प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। वायु प्रदूषण से गर्भपात, गर्भावस्था संबंधी समस्याएं और मृत जन्म के मामले बढ़ सकते हैं, जिससे महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन भी वायु प्रदूषण के प्रभाव को बढ़ाता है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनों में उतार-चढ़ाव के कारण महिलाओं पर प्रदूषण का असर अधिक हो सकता है। इसके अलावा, कई क्षेत्रों में महिलाएं खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन का उपयोग करती हैं, जिससे वे लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेती हैं।
पर्यावरणीय कारक कर सकते हैं प्रभावित
शोध यह भी बताते हैं कि पर्यावरणीय कारक प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। कीटनाशकों, प्लास्टिक और वायु प्रदूषकों में मौजूद हार्मोनल बाधक महिलाओं के हार्मोनल चक्र को बाधित कर सकते हैं, अंडाणु की गुणवत्ता को कम कर सकते हैं और गर्भधारण को कठिन बना सकते हैं। पुरुषों में भी शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम हो सकती है। इसके अतिरिक्त, आहार, व्यायाम, धूम्रपान और शराब का सेवन जैसी जीवनशैली की आदतें भी प्रजनन स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती हैं।
सुरक्षा उपाय और बेहतर जीवनशैली
हालांकि वायु प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय है, महिलाएं कुछ कदम उठाकर अपनी सुरक्षा कर सकती हैं। अपने इलाके में वायु गुणवत्ता के बारे में जागरूक रहें और स्थानीय प्रदूषण स्तर और पूर्वानुमान की जानकारी प्राप्त करें। रसोई में वेंटिलेशन सुधारें, साफ ईंधन का उपयोग करें और एयर प्यूरीफायर में निवेश करें। इसके साथ ही, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित रखें।
अंततः, स्वच्छ वायु अभियानों और सख्त प्रदूषण नियमों के लिए अन्य महिलाओं के साथ मिलकर प्रयास करें और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।























