हैल्थ न्यूज. मोटापे के निदान के लिए एक नई विधि को मानक बनाने की आवश्यकता की बात सामने आई है, जिसमें रोगी की कमर के व्यास, चिकित्सा इतिहास और अन्य परीक्षणों का भी ध्यान रखना जरूरी होगा। दशकों से, दुनिया भर में मोटापे का निदान बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) के आधार पर किया जा रहा था, लेकिन अब लैंसेट आयोग ने डॉक्टरों से इसे केवल एक मापदंड के रूप में उपयोग करने से बचने की अपील की है।
बीएमआई पद्धति में खामियां
बीएमआई का निर्धारण केवल वजन और ऊंचाई के आधार पर किया जाता है, लेकिन इसमें शरीर में वसा या मांसपेशियों का स्तर शामिल नहीं होता। इस पद्धति से 30 से ऊपर के बीएमआई वाले व्यक्तियों को मोटापा माना जाता है, जबकि 25 से 30 तक के वजन वाले अधिक वजन के व्यक्ति माने जाते हैं। यह विधि सही जानकारी नहीं प्रदान कर पाती है। कई बार, यह बड़ी हड्डियों या मजबूत मांसपेशियों वाले व्यक्तियों को गलत तरीके से मोटा घोषित कर सकती है, जो कि अति-निदान का कारण बन सकता है।
नई विधि का प्रस्ताव
लैंसेट आयोग ने डॉक्टरों से यह अपील की है कि वे मरीजों को केवल तभी मोटापे से ग्रस्त मानें जब उन्हें कोई संबंधित बीमारी हो, जैसे कि टाइप 2 मधुमेह, जो अतिरिक्त वसा के कारण हो सकती है। डॉक्टरों को मरीजों के वजन और माप के अलावा उनके चिकित्सा इतिहास की भी पूरी जांच करनी चाहिए। साथ ही, शरीर में वसा का स्तर मापने के लिए शारीरिक परीक्षण जैसे कि कमर के व्यास का माप लेना भी आवश्यक है।
मोटापे की श्रेणियां
प्रीक्लिनिकल मोटापा: इसमें शरीर में अतिरिक्त वसा होती है, लेकिन कोई गंभीर बीमारी नहीं होती। इन व्यक्तियों को जीवनशैली में सुधार के लिए परामर्श और निगरानी दी जाती है।
नैदानिक मोटापा: जब शरीर में अतिरिक्त वसा अंगों को नुकसान पहुंचाती है और इससे हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं। ऐसे मामलों में दवाओं या सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
मोटापा क्या है?
मोटापा शरीर में अत्यधिक वसा जमा होने की स्थिति है, जो स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकती है। यह एक दीर्घकालिक स्थिति है, जिसे समय पर नियंत्रित न किया जाए तो यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। आयोग की सिफारिशों का विश्वभर के 76 संगठनों ने समर्थन किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अब मोटापे के निदान के लिए नई विधि को लागू करने की आवश्यकता है।























