हेल्थ न्यूज. रवांडा में खतरनाक मारबर्ग वायरस रोग (एमवीडी) के प्रकोप ने 15 लोगों की जान ले ली है। यह वायरस, जिसे “ब्लीडिंग आई वायरस” भी कहा जाता है, एक गंभीर और अक्सर जानलेवा बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे इबोला के समान दुर्लभ रक्तस्रावी बुखार के रूप में वर्णित किया है। यूके डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, इस वायरस की मृत्यु दर 50% से 88% तक हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय चेतावनियां और सतर्कता
अमेरिका और ब्रिटेन ने अपने नागरिकों को अफ्रीका की यात्रा करते समय सतर्क रहने की सलाह दी है। ब्रिटेन ने संभावित मामलों की बढ़ती संख्या के बीच नागरिकों को यात्रा के लिए उपयुक्तता जांचने के निर्देश दिए हैं। अमेरिका में हवाई अड्डों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है, खासतौर से उन यात्रियों के लिए, जिन्होंने हाल ही में रवांडा की यात्रा की है।
मारबर्ग वायरस के लक्षण और खतरनाक प्रभाव
मारबर्ग वायरस के लक्षण अचानक प्रकट होते हैं, जिसमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक कमजोरी शामिल हैं। तीसरे दिन मरीजों को डायरिया, पेट दर्द, उल्टी और बिना खुजली वाले चकत्ते हो सकते हैं। पांचवें दिन खून की उल्टी, मल में खून, और नाक, मसूड़ों और आंखों से खून बहना जैसे लक्षण सामने आते हैं। लक्षणों की शुरुआत के 8-9 दिन बाद रक्त की कमी और शॉक सिंड्रोम के कारण मृत्यु हो सकती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार वायरस की पुष्टि के तरीके
इस वायरस की पुष्टि मलेरिया, टाइफाइड, मेनिन्जाइटिस और अन्य वायरल बुखार से अलग करने में मुश्किल होती है। निदान के लिए निम्नलिखित तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं:
- एंटीबॉडी-कैप्चर एलिसा टेस्ट
एंटीजन-कैप्चर डिटेक्शन टेस्ट
आरटी-पीसीआर परीक्षण
कोशिका संवर्धन द्वारा वायरस पृथक्करण
दुनिया में अन्य संक्रामक बीमारियों का बढ़ता खतरा
मारबर्ग के अलावा, अन्य संक्रामक बीमारियां जैसे एमपॉक्स और ओरोपोचे वायरस भी कई देशों में चिंता का विषय बने हुए हैं। हाल ही में यूके में एमपॉक्स के गंभीर मामलों की पुष्टि हुई है, जो पहले केवल मध्य अफ्रीका तक सीमित थे।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं, प्रतिरक्षा-विहीन व्यक्तियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। यात्रा के पहले डॉक्टर से परामर्श करना और स्वास्थ्य बीमा की जांच करना आवश्यक बताया गया है।























