पंजाब यूनिवर्सिटी को हमेशा पंजाब की शान माना गया है और यहां से पंजाब की सोच और पहचान बनी है। जब केंद्र ने बिना जानकारी दिए सीनेट खत्म करने का आदेश निकाला तो यह बात पंजाब के लोगों को सही नहीं लगी। सबने कहा कि ये सिर्फ़ एक दफ्तर या कागज़ का फैसला नहीं बल्कि पंजाब के अधिकारों पर सीधा हस्तक्षेप है। छात्रों से लेकर शिक्षकों तक सबको लगा कि उनके घर में बिना पूछे घुसकर फैसला थोप दिया गया है। इसी वजह से यह मुद्दा तुरंत गरम हो गया और पूरे पंजाब में चर्चा का विषय बन गया।
इतनी जल्दी सड़कें क्यों भर गईं?
चंडीगढ़ से लेकर लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, जालंधर तक हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था — “पंजाब की पहचान किसी की ज़बरदस्ती नहीं।” छात्रों ने शांतिपूर्वक और अनुशासन के साथ विरोध किया लेकिन आवाज़ बहुत मजबूत थी। उन्होंने कहा कि अगर आज पंजाब यूनिवर्सिटी चुपचाप छिन गई, तो कल और संस्थान भी चले जाएंगे। छात्रों ने कहा कि हम सिर्फ़ पढ़ने वाले नहीं, अपनी मिट्टी के पहरेदार भी हैं। आवाज़ में क्रोध नहीं था, लेकिन दृढ़ता थी।
इसमें आम आदमी पार्टी कहाँ खड़ी है?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी सिर्फ़ एक कैंपस नहीं, ये पंजाब की आत्मा है। उन्होंने याद दिलाया कि यहां से शहीद भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी निकले, यहां से पंजाब ने अपने बड़े नेता और विचारक पाए। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने छात्रों के साथ खड़े होकर संदेश दिया कि यह लड़ाई सिर्फ़ राजनीति नहीं, पंजाब की इज़्ज़त की है। उनका कहना था कि पंजाब अपने अधिकारों पर समझौता नहीं करता।
केंद्र सरकार की दलील क्या है?
केंद्र ने कहा कि यह सिर्फ़ प्रशासनिक फैसला है, लेकिन पंजाब में सवाल उठे कि अगर यह सामान्य प्रक्रिया थी तो बिना बातचीत और बिना सूचना क्यों की गई। लोगों ने कहा कि जहां-जहां बीजेपी की सरकार नहीं होती, वहां ऐसे फैसले संस्थानों पर नियंत्रण की कोशिश जैसे दिखाई देते हैं। पंजाब के लोगों ने इसे उसी ढांचे में देखा और बिना देर किए विरोध शुरू कर दिया।
छात्र संगठन ने कैसी भूमिका निभाई?
एएसएपी नाम के छात्र संगठन ने आंदोलन को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से चलाया। उन्होंने कॉलेजों और यूनिवर्सिटी कैंपस में बैठकर मीटिंग कीं और सबको एकजुट किया। छात्र नेताओं ने कहा कि हम अधिकार मांगते नहीं, अपने अधिकारों की रक्षा करते हैं। उनका कहना था कि पंजाब का युवा केवल सोशल मीडिया पर नहीं, सड़क पर भी अपनी आवाज़ उठाना अच्छी तरह जानता है।
लड़ाई अब किस स्तर पर पहुंच चुकी है?
यह मामला अब सिर्फ़ शिक्षा से जुड़ा विवाद नहीं रहा, यह पंजाब की स्वायत्तता और स्वाभिमान का बड़ा मुद्दा बन चुका है। लोग कह रहे हैं कि पंजाब ने हमेशा अन्याय का विरोध किया है और यह उसकी मिट्टी का स्वभाव है। इस लड़ाई में अब लेखक, कलाकार, विचारक और पंजाब का प्रवासी समाज भी शामिल हो रहा है। सोशल मीडिया पर #SavePunjabUniversity ज़ोर से ट्रेंड कर रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
अगर केंद्र सरकार अपना आदेश वापस नहीं लेती, तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है। एएसएपी ने साफ कहा है कि जरूरत पड़ी तो पंजाब में चक्का जाम भी किया जाएगा। आम आदमी पार्टी ने भी कहा कि सरकार जनता के साथ खड़ी है और पीछे नहीं हटेगी। संदेश साफ है — पंजाब दबता नहीं, Punjab अपनी पहचान खुद बचाता है।























