एम्स भोपाल में लिफ्ट के अंदर महिला कर्मचारी से मंगलसूत्र छीने जाने की घटना ने देश के नामी अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या अस्पताल के अंदर भी महिला सुरक्षित नहीं?
एम्स भोपाल को हाई सिक्योरिटी अस्पताल माना जाता है, लेकिन रविवार शाम की घटना ने इस भरोसे को हिला दिया। लिफ्ट जैसी बंद जगह में चोरी हुई। महिला कर्मचारी अकेली थी। आसपास कोई गार्ड मौजूद नहीं था। तुरंत किसी ने मदद नहीं की। ये सारी बातें अस्पताल की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन गईं।
लिफ्ट तक चोर कैसे पहुंच गया?
पीड़िता वर्षा सोनी एम्स के स्त्री रोग विभाग में अटेंडर है। वह ड्यूटी के दौरान ब्लड बैंक के पीछे वाली लिफ्ट से जा रही थी। उस वक्त लिफ्ट खाली थी। मास्क और टोपी पहने एक युवक अंदर आया। उसने सामान्य बातचीत की। फ्लोर के बारे में पूछा। सब कुछ सामान्य लगा। किसी को शक नहीं हुआ।
अचानक हमला कैसे किया गया?
जैसे ही लिफ्ट तीसरी मंजिल पर पहुंची, युवक ने पीछे मुड़कर महिला के गले में पहना मंगलसूत्र खींच लिया। वर्षा ने विरोध किया। खुद को बचाने की कोशिश की। चोर ने धक्का दे दिया। संतुलन बिगड़ गया। मंगलसूत्र की माला टूटकर नीचे गिर गई। चेन लेकर चोर सीढ़ियों से भाग गया।
सीसीटीवी होने के बावजूद चोर कैसे बच निकला?
पूरी वारदात लिफ्ट में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। लेकिन घटना के वक्त लिफ्ट इलाके में कोई सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं था। चोर आराम से निकल गया। यह बात प्रशासन की लापरवाही को साफ दिखाती है।
छुट्टी वाले दिन सुरक्षा क्यों कम थी?
बताया गया है कि रविवार की छुट्टी के कारण सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम थी। इसी का फायदा चोर ने उठाया। पहले भी कैंपस में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन लिफ्ट के अंदर महिला से चेन छीनने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि जब गार्ड नहीं दिखते, तो सुरक्षा सिर्फ कागजों में रह जाती है।
घटना के बाद पीड़िता की हालत क्या रही?
वारदात के बाद वर्षा सोनी सदमे में लिफ्ट के पास बैठकर रो पड़ी। करीब दस मिनट बाद एक गार्ड राउंड पर आया। फिर अधिकारियों को सूचना दी गई। महिला ने बागसेवनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस सीसीटीवी के आधार पर जांच कर रही है।
एम्स प्रशासन अब क्या सीखेगा?
इस घटना ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। अस्पताल सिर्फ मरीजों के लिए नहीं, कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित होना चाहिए। लिफ्ट जैसी जगह पर गार्ड न होना बड़ी चूक है। अब सवाल है कि प्रशासन सिर्फ बयान देगा या ठोस कदम भी उठाएगा।

























