एयर इंडिया की फ्लाइट AI-132 को लेकर शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई थी। यह घटना उड़ान से पहले प्री फ्लाइट चेक के दौरान सामने आई। चालक दल ने बाएं इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच में असामान्य हरकत देखी। स्विच रन की स्थिति में स्थिर नहीं रहा। वह दो बार कटऑफ की ओर खिसका। इससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी। एहतियातन विमान को ग्राउंड किया गया।
फ्यूल कंट्रोल स्विच इतना संवेदनशील क्यों है?
फ्यूल कंट्रोल स्विच इंजन में ईंधन की आपूर्ति नियंत्रित करता है। उड़ान के दौरान इसका कटऑफ होना खतरनाक हो सकता है। इससे इंजन अचानक बंद हो सकता है। यही वजह है कि चालक दल ने तुरंत रिपोर्ट की। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान को रोका गया। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि मानी गई। किसी भी जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया गया।
DGCA की जांच में क्या सामने आया?
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने मामले की विस्तृत जांच की। जांच में इंजन के प्रदर्शन में कोई गड़बड़ी नहीं मिली। उड़ान के दौरान सभी सिस्टम सामान्य पाए गए। एयर इंडिया के इंजीनियरों ने स्विच की जांच की। DGCA अधिकारियों की मौजूदगी में निरीक्षण हुआ। तकनीकी खराबी के सबूत नहीं मिले। स्विच मानकों के अनुरूप काम करता पाया गया।
स्विच खिसकने की असली वजह क्या निकली?
जांच में सामने आया कि समस्या दबाव की दिशा से जुड़ी हो सकती है। जब बेस प्लेट के समानांतर सही दिशा में दबाव डाला गया तो स्विच सुरक्षित रहा। लेकिन कोणीय बेस प्लेट के कारण गलत दिशा में दबाव पड़ सकता है। उंगली या अंगूठे से तिरछा दबाव स्विच को खिसका सकता है। यह मानवीय संपर्क की संभावना दर्शाता है। इसे तकनीकी फेलियर नहीं माना गया। DGCA ने इसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष बताया।
पुल-टू-अनलॉक सिस्टम कितना सुरक्षित है?
DGCA ने पुल-टू-अनलॉक फीचर की भी जांच की। यह सिस्टम स्विच को ऊपर खींचे बिना हिलने नहीं देता। जांच में यह फीचर पूरी तरह सही पाया गया। यह बोइंग के तय मानकों के भीतर काम कर रहा है। सिस्टम का उद्देश्य गलती से इंजन बंद होने से बचाना है। किसी तरह की डिजाइन खामी नहीं मिली। सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक मानी गई।
चालक दल को क्या निर्देश दिए गए?
DGCA ने चालक दल के लिए नई सावधानियां दोहराईं। उड़ान के दौरान स्विच के साथ अनावश्यक संपर्क से बचने को कहा गया। कॉकपिट में हाथों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई। मानवीय भूल से बचाव पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण प्रक्रियाओं की समीक्षा भी की जाएगी। सुरक्षा मानकों में बदलाव की जरूरत नहीं बताई गई। सतर्कता को ही समाधान माना गया।
इस घटना से क्या सीख मिली?
DGCA की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह गंभीर तकनीकी खराबी नहीं थी। विमान और उसके सिस्टम सुरक्षित पाए गए। घटना ने मानवीय कारक की भूमिका को उजागर किया। भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचाव संभव बताया गया। एयर इंडिया की सुरक्षा प्रक्रियाएं सही मानी गईं। यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं है। विमानन सुरक्षा को लेकर भरोसा कायम रखा गया।

























