पंजाब की राजनीति में दल बदल का दौर जारी है। अब भाजपा के एससी विंग के प्रदेश वित्त सचिव रहे अमरजीत सिंह कोकरी कलां ‘आप’ में शामिल हो गए हैं। इसे भाजपा के लिए अहम झटका माना जा रहा है। चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में यह औपचारिक ऐलान हुआ। कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने उनका स्वागत किया। उनके साथ कई समर्थक भी पहुंचे। ‘आप’ नेताओं ने इसे जन समर्थन का संकेत बताया। राजनीतिक हलकों में इस कदम की चर्चा तेज है।
क्या भाजपा की नीतियों से नाराज़गी थी?
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अमरजीत सिंह भाजपा की जन-विरोधी नीतियों से निराश थे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा आम लोगों से दूर हो चुकी है। अमरजीत सिंह ने भी कहा कि वे जनता के मुद्दों पर काम करना चाहते हैं। उन्होंने ‘आप’ सरकार की योजनाओं की सराहना की। खासकर 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का जिक्र किया। स्वास्थ्य बीमा योजना को भी बड़ा कारण बताया गया। मंच से कहा गया कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है।
क्या ‘आप’ की योजनाओं ने असर किया?
‘आप’ नेताओं ने कहा कि सरकार के काम से लोग प्रभावित हो रहे हैं। मुफ्त बिजली और स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं को आम परिवारों के लिए राहत बताया गया। अमरजीत सिंह ने कहा कि उन्हें जमीनी काम पसंद आया। उनका कहना था कि सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग को राहत दी है। यही वजह है कि उन्होंने नया राजनीतिक रास्ता चुना। इसे ‘आप’ की बढ़ती स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी इसे सकारात्मक संदेश मान रही है।
क्या समर्थकों का बड़ा जत्था भी साथ आया?
अमरजीत सिंह के साथ कई स्थानीय नेता भी ‘आप’ में शामिल हुए। मनजीत सिंह बिलासपुर की अगुवाई में सरपंच, पंच और नंबरदार मंच पर मौजूद थे। कार्यक्रम में सभी नए सदस्यों का स्वागत किया गया। चीमा ने भरोसा दिलाया कि उन्हें पार्टी में सम्मान मिलेगा। जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी। इससे स्थानीय संगठन मजबूत होने की उम्मीद जताई गई। इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों से जोड़ा जा रहा है।
क्या फौजी पृष्ठभूमि भी अहम है?
चीमा ने कहा कि अमरजीत सिंह ने पहले सेना में सेवा दी है। उन्होंने देश की सेवा की और फिर सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे। इस अनुभव को पार्टी के लिए फायदेमंद बताया गया। कहा गया कि अनुशासन और समर्पण राजनीति में जरूरी है। ‘आप’ ने इसे सकारात्मक संकेत बताया। मंच से उनकी सेवाओं का उल्लेख किया गया। इसे ईमानदार राजनीति की दिशा में कदम बताया गया।
क्या दलित राजनीति पर असर पड़ेगा?
अमरजीत सिंह एससी विंग से जुड़े रहे हैं। इसलिए इस कदम को दलित राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे भाजपा का आधार प्रभावित हो सकता है। ‘आप’ पहले से दलित वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस शामिल होने से संदेश गया है कि बदलाव की प्रक्रिया जारी है। खासकर ग्रामीण इलाकों में इसका असर देखने को मिल सकता है। आने वाले चुनावों में इसका असर दिख सकता है।
क्या सियासी मुकाबला और तेज होगा?
पंजाब की राजनीति पहले से गर्म है। अब इस शामिल होने से नया मोड़ आ गया है। भाजपा की ओर से जवाब आने की संभावना है। ‘आप’ इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है। राजनीतिक माहौल और तेज होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में बयानबाजी बढ़ सकती है। फिलहाल यह कदम सियासी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
























