उड़ते विमान में एक बुज़ुर्ग की अचानक तबियत बिगड़ गई। उसके हाथ-पैर भी ठंडे पड़ गए, एक पल के लिए तो ऐसा लगा कि अब वह नहीं बचेगा। लेकिन तभी सीमा पर देश की रक्षा कर रहे भारतीय सेना के मेजर भगवान बनकर आए और उस बुज़ुर्ग को नई ज़िंदगी दे दी। इंडिगो की उड़ान संख्या 6E-6011 में हुई, जो चेन्नई से गुवाहाटी जा रही थी।
भारतीय सेना ने एक बयान में कहा कि इंडिगो की उड़ान में सवार एक 75 वर्षीय यात्री को शाम लगभग 6:20 बजे एक मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ा। वह बेहोश हो गया और उसमें हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण दिखाई देने लगे, जिसमें अत्यधिक पसीना आना, नाड़ी का कमजोर होना और हाथ-पैर ठंडे पड़ना शामिल है। केबिन क्रू ने तुरंत उसे ऑक्सीजन दी और विमान में चिकित्सा सहायता के लिए घोषणा की।
सेना ने आगे कहा, “उस समय छुट्टी से लौट रहे सेना के डॉक्टर मेजर मुकुंदन ने तुरंत उस व्यक्ति की मदद की। जाँच करने पर, उन्होंने पाया कि मरीज़ अर्ध-चेतन अवस्था में था, उसकी पुतलियाँ प्रतिक्रिया कर रही थीं और हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण थे।” उड़ान के दौरान सीमित संसाधनों के साथ, मेजर मुकुंदन ने मरीज़ को मुँह से चीनी और ओआरएस दिया, साथ ही उसकी नब्ज़ और ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी भी की।” सेना ने कहा, “इसके बाद, गुवाहाटी में उतरने पर, मरीज़ को तुरंत हवाई अड्डे के आपातकालीन कक्ष में ले जाया गया जहाँ मेजर मुकुंदन ने उसका इलाज जारी रखा।” रात लगभग 8 बजे, मरीज़ को होश आया और उसकी हालत स्थिर हो गई। मेजर मुकुंदन की त्वरित और निस्वार्थ कार्रवाई और चालक दल के सदस्यों के तत्काल सहयोग ने सुनिश्चित किया कि यात्री की जान बच गई।”

























