भारत ने आतंकवाद से लड़ाई के लिए नया दस्तावेज जारी किया है।इस नीति का नाम प्रहार रखा गया है।इसे देश की पहली व्यापक एंटी टेरर रणनीति माना जा रहा है।इसमें हर प्रकार के आतंक से निपटने की योजना शामिल है।सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति स्पष्ट की है।दस्तावेज के अनुसार आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाएगा।मुख्य ध्यान सुरक्षा और त्वरित कार्रवाई पर है।
प्रहार का मुख्य लक्ष्य क्या बताया गया?
नीति का लक्ष्य हमलों को पहले ही रोकना है।यदि हमला हो तो तुरंत और सही जवाब देना भी शामिल है।सभी विभागों में समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है।मानवाधिकारों की सुरक्षा को भी महत्व दिया गया है।कानूनी प्रक्रिया मजबूत करने की बात कही गई है।कट्टरपंथ कम करने के लिए सामाजिक प्रयास शामिल हैं।अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी नीति का हिस्सा बनाया गया है।
सीमा पार कौन से खतरे बताए गए?
दस्तावेज में सीमा पार आतंकवाद को बड़ा खतरा बताया गया है।विदेशी संगठन साजिश रचने की कोशिश करते हैं।स्लीपर सेल के जरिए हिंसा फैलाने के प्रयास भी सामने आए हैं।विदेशी हैंडलर नई तकनीक का उपयोग करते हैं।ड्रोन के जरिए सामग्री भेजने की चुनौती बढ़ी है।संगठित अपराध नेटवर्क लॉजिस्टिक सहायता देते हैं।इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां पैदा होती हैं।
ड्रोन और तकनीकी दुरुपयोग कैसे चिंता बना?
पंजाब और जम्मू कश्मीर में ड्रोन गतिविधियां बढ़ी हैं।आतंकी नई तकनीक के जरिए नए तरीके अपना रहे हैं।रोबोटिक्स और अन्य उपकरणों के दुरुपयोग की आशंका है।इससे सुरक्षा के लिए नई योजनाएं बनाई गई हैं।निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।ड्रोन रोधी तकनीक विकसित करने पर जोर है।यह भविष्य के खतरों को कम करने के लिए जरूरी माना गया है।
साइबर हमले क्यों बड़ी चुनौती बने?
साइबर हमले अब सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।हैकर्स और कुछ देश भारत को निशाना बनाते हैं।सोशल मीडिया के जरिए प्रचार और फंडिंग होती है।डार्क वेब और क्रिप्टो टूल का उपयोग किया जाता है।एन्क्रिप्शन के कारण ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।नीति इस क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने की बात करती है।
महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
नीति में अहम क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष जोर है।बिजली और रेलवे जैसे सेक्टर संवेदनशील माने गए हैं।एविएशन और पोर्ट भी सुरक्षा दायरे में हैं।रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र की सुरक्षा शामिल है।परमाणु ऊर्जा से जुड़े ढांचों की रक्षा जरूरी बताई गई है।राज्य और गैर राज्य तत्वों से खतरे का उल्लेख है।इसलिए सुरक्षा तंत्र मजबूत करने की योजना बनाई गई है।
युवाओं और सामाजिक स्तर पर क्या रणनीति बनी?
कट्टरपंथ रोकने के लिए युवाओं को सकारात्मक दिशा में जोड़ने की योजना है।जेलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।मध्यमार्गी धर्मगुरु और एनजीओ सहयोग देंगे।पुलिस चरणबद्ध प्रतिक्रिया के तहत कार्रवाई करेगी।संदिग्ध गतिविधियों पर कानूनी कार्रवाई होगी।अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा।इससे आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक लड़ाई मजबूत होने की उम्मीद है।

























