बीएसएनएल डायरेक्टर विवेक बंजल का प्रयागराज दौरा अचानक विवादों में आ गया।दफ्तर का आदेश वायरल होने से लोग हैरान रह गए।आदेश में विशेष प्रोटोकॉल का उल्लेख किया गया था।कुछ निजी उपयोग की चीजें भी सूची में शामिल थीं।सोशल मीडिया पर मामला तेजी से फैल गया।लोगों ने सरकारी खर्च पर सवाल उठाए।इससे प्रशासन पर दबाव बढ़ता दिखा।
क्या निजी चीजों ने बढ़ाया विवाद?
आदेश में दर्ज वस्तुओं ने सबसे ज्यादा चर्चा पैदा की।स्नान किट में तौलिया और अंडरगारमेंट शामिल बताए गए।चप्पल, कंघी और शीशे की मांग भी दर्ज थी।तेल की बोतल का जिक्र भी सामने आया।घाट पर बेडशीट की व्यवस्था की बात कही गई।होटल में फल और ड्राई फ्रूट उपलब्ध कराने को कहा गया।लोगों को यह निजी यात्रा जैसा लगा।
क्या मंत्री ने सख्त रुख अपनाया?
मामला केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंचा।उन्होंने आदेश को चौंकाने वाला बताया।मंत्री ने नियमों के उल्लंघन को अस्वीकार्य कहा।21वीं सदी में ऐसे व्यवहार को गलत बताया गया।डायरेक्टर को शो कॉज नोटिस जारी किया गया।सात दिनों में जवाब मांगा गया।सख्त कार्रवाई का संकेत भी दिया गया।
क्या विवाद से दौरा रद्द हुआ?
वायरल आदेश के बाद विवेक बंजल का दौरा रद्द कर दिया गया।दौरे के दौरान उन्हें संगम स्नान करना था।नाव यात्रा और मंदिर दर्शन का कार्यक्रम भी था।लेकिन आदेश सार्वजनिक होने से विवाद बढ़ गया।विवाद से बचने के लिए दौरा रोक दिया गया।सरकारी स्तर पर स्पष्टीकरण जरूरी माना गया।इससे मामला गंभीर बन गया।
क्या अधिकारियों पर दबाव पड़ा?
आदेश में करीब पचास अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी।इन कार्यों को बीस बिंदुओं में बांटा गया था।रहने और खाने की व्यवस्था भी शामिल थी।कुछ निजी सुविधाओं का प्रबंध भी दर्ज था।कुछ अधिकारियों ने इसे अतिरिक्त दबाव बताया।सोशल मीडिया पर भी सवाल उठे।सरकारी संसाधनों के उपयोग पर बहस छिड़ गई।
क्या सरकार अगला कदम उठाएगी?
शो कॉज नोटिस के बाद अब जवाब का इंतजार किया जा रहा है।जवाब के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।सरकार ने मामले को गंभीर बताया है।सरकारी प्रोटोकॉल की समीक्षा की जरूरत सामने आई।भविष्य में नियम सख्त किए जा सकते हैं।पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया जाएगा।इससे ऐसे मामलों पर रोक की उम्मीद है।
क्या जनता की प्रतिक्रिया तेज रही?
सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।कई लोगों ने इसे सरकारी फिजूलखर्ची बताया।कुछ ने सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।मामले ने सरकारी प्रोटोकॉल पर बहस बढ़ा दी।जनता ने पारदर्शिता की जरूरत बताई।प्रशासन पर दबाव बढ़ता दिखा।मामला अभी भी चर्चा में बना हुआ है।
























