बजट 2026 में लड़कियों के लिए हर जिले में हॉस्टल बनाने की घोषणा की गई।सरकार का कहना है कि इससे दूर रहकर पढ़ने वाली छात्राओं को सुविधा मिलेगी।पंजाब में इसका असर ज्यादा बताया जा रहा है।क्योंकि बड़ी संख्या में लड़कियां बाहर पढ़ाई कर रही हैं।राज्य सरकार पहले से पांच कामकाजी महिला हॉस्टल बना रही है।इन पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे।लेकिन सवाल है कि क्या यही पंजाब की सबसे बड़ी जरूरत थी।
कामकाजी महिलाओं को क्या सच में सहारा मिलेगा?
मोहाली, जालंधर और अमृतसर में बन रहे हॉस्टल दिसंबर 2026 तक पूरे होने हैं।हर हॉस्टल में 150 से 200 महिलाओं के रहने की व्यवस्था होगी।सुरक्षा, सीसीटीवी, वाईफाई और मेडिकल सुविधा की बात कही गई है।कागजों पर योजना मजबूत दिखती है।लेकिन जमीन पर क्रियान्वयन हमेशा चुनौती रहा है।कई योजनाएं समय पर पूरी नहीं होतीं।इसी वजह से भरोसा अधूरा है।
मुख्यमंत्री मान ने बजट को नाकाम क्यों कहा?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा कि बजट पंजाब की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।किसानों के लिए एमएसपी पर कोई ठोस ऐलान नहीं हुआ।युवाओं के लिए रोजगार की कोई गारंटी नहीं दिखी।उद्योग और टैक्स राहत भी नदारद रही।राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उपाय गायब हैं।मान का कहना है कि पंजाब से फिर भेदभाव हुआ।यही नाराजगी की सबसे बड़ी वजह है।
स्वास्थ्य और कैंसर मरीजों को कितनी राहत?
बजट में जिला अस्पतालों में ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाएं बढ़ाने की बात हुई।सरकार का दावा है कि क्षमता 50 प्रतिशत तक बढ़ेगी।कैंसर की 17 दवाओं को कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है।मालवा क्षेत्र के लिए यह अहम माना जा रहा है।क्योंकि यहां कैंसर का बोझ ज्यादा है।इलाज सस्ता होगा यह उम्मीद है।लेकिन सिस्टम की कमजोरी अब भी चिंता है।
किसानों के मुद्दे फिर क्यों पीछे रह गए?
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बजट को किसान विरोधी बताया।कणक और धान के अलावा एमएसपी का कोई रोडमैप नहीं है।फसल विविधता के लिए कोई पैकेज नहीं दिया गया।बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए कोई खास फंड नहीं रखा गया।खर्च बढ़ता जा रहा है।आमदनी का भरोसा नहीं है।इससे किसानों में निराशा और गहरी हुई।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया क्या बताती है?
कांग्रेस और अकाली दल दोनों ने बजट की आलोचना की।अमरिंदर सिंह वड़िंग ने कहा कि बजट भाषण में पंजाब का नाम तक नहीं लिया गया।अकाली दल ने इसे केंद्रीय सोच का उदाहरण बताया।दलितों और भूमिहीन मजदूरों के लिए कुछ नहीं रखा गया।राज्य पर कर्ज बढ़ता जा रहा है।विशेष पैकेज की मांग फिर अनसुनी रह गई।यह नाराजगी सिर्फ विपक्ष की नहीं है।
क्या बजट पंजाब की असल जरूरतें समझ पाया?
भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने बजट को संतुलित बताया।उनका कहना है कि यह 2047 के लक्ष्य की दिशा में कदम है।महिला हॉस्टल और बुनियादी ढांचे की बात की गई।लेकिन जमीनी सवाल अपनी जगह कायम हैं।महंगाई, बेरोजगारी और किसान संकट जस के तस हैं।घोषणाएं हैं, समाधान अधूरे हैं।सौरभ द्विवेदी की नजर में यही बजट की सबसे बड़ी कहानी है।

























