नई दिल्ली. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी बुधवार शाम दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”हमने संसद में कहा था कि हम जातिगत जनगणना कराएंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि 50 प्रतिशत (आरक्षण) की दीवार भी तोड़ दी जाएगी। पता नहीं अचानक क्या हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी ने आज जाति जनगणना की घोषणा कर दी। अब हम सरकार से जानना चाहते हैं कि ऐसा कब होगा। इस संबंध में तेलंगाना एक आदर्श राज्य बन गया है। इसके लिए बेहतर खाका की आवश्यकता है। हम इसे डिज़ाइन करेंगे और आपको देंगे।
राहुल गांधी ने कहा, ”मुझे नहीं पता कि क्या हुआ, लेकिन आज अचानक 11 साल बाद सरकार ने जाति जनगणना की घोषणा कर दी।” हम इसका पूर्ण समर्थन करते हैं लेकिन हम एक समय-सीमा चाहते हैं। यह पहला चरण हैं। जाति जनगणना में तेलंगाना एक मॉडल बन गया है। हम जाति जनगणना की रूपरेखा तैयार करने में सरकार का समर्थन करते हैं। बिहार और तेलंगाना भी इसके दो उदाहरण हैं। हालाँकि, दोनों के बीच एक बड़ा अंतर है।
में जाति जनगणना से आगे बढ़ने की जरूरत है
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘मैं दोहराना चाहता हूं कि जाति जनगणना पहला कदम है।’’ हमारा लक्ष्य जाति जनगणना के माध्यम से विकास की नई मिसाल कायम करना है। सिर्फ आरक्षण ही नहीं, हम यह भी जानना चाहते हैं कि इस देश में ओबीसी, दलित और आदिवासियों की भागीदारी क्या है? यह बात जाति जनगणना से पता चलेगी, लेकिन हमें जाति जनगणना से आगे जाना होगा। कांग्रेस ने एक और मुद्दा उठाया था। इसका उल्लेख घोषणापत्र यानी अनुच्छेद 15(5) में भी किया गया था। अर्थात निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण। यह पहले से ही एक कानून है। हम चाहते हैं कि सरकार इसका क्रियान्वयन शुरू करे।
कांग्रेस की सरकार से चार मांगें हैं
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को स्पष्ट तौर पर बताना चाहिए कि जाति जनगणना कब और कैसे कराई जाएगी।
तेलंगाना मॉडल का जिक्र: कांग्रेस सांसद ने सुझाव दिया कि सरकार को तेलंगाना जैसा जाति सर्वेक्षण मॉडल अपनाना चाहिए, जो तेज, पारदर्शी और समावेशी हो। 50% आरक्षण की सीमा हटाने की वकालत: राहुल ने कहा, जातिगत आंकड़ों के आधार पर 50% आरक्षण की सीमा हटाना जरूरी होगा। निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण: कांग्रेस सांसद ने कहा, सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।























