एनसीआर में एलपीजी और प्राकृतिक गैस की कमी ने नई चिंता पैदा कर दी है। हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। अब उद्योगों, होटलों और रेस्टोरेंट्स को वैकल्पिक ईंधन इस्तेमाल करने की छूट दी गई है। यह छूट अस्थायी तौर पर लागू की गई है। मकसद यह है कि उत्पादन और कारोबार बंद न हों। गैस की कमी से कई इकाइयों का काम प्रभावित हो रहा था। इसलिए यह नया आदेश जारी किया गया।
फैसले के पीछे क्या कारण
इस फैसले के पीछे मुख्य वजह प्राकृतिक गैस की कम आपूर्ति बताई जा रही है। दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटें देखी जा रही हैं। केंद्र सरकार ने भी ‘प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश 2026’ जारी किया है। इसके बाद कई उद्योगों को काम चलाने में दिक्कत आने लगी। हालात की समीक्षा की गई। फिर पेट्रोलियम मंत्रालय और गैस एजेंसियों से चर्चा हुई। इसके बाद यह फैसला लिया गया।
अब कौन से ईंधन इस्तेमाल होंगे
नए आदेश में कुछ वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। सबसे पहले हाई स्पीड डीजल का उपयोग किया जा सकेगा। इसके साथ बायोमास और आरडीएफ पेलेट्स भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अगर यह भी उपलब्ध नहीं हों तो अंतिम विकल्प के रूप में कोयला और मिट्टी का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है। यह छूट केवल अस्थायी तौर पर दी गई है। मकसद उद्योगों को बंद होने से बचाना है। ताकि उत्पादन चलता रहे।
आदेश में क्या अहम शर्तें
आयोग के आदेश में कुछ जरूरी शर्तें भी रखी गई हैं। यह छूट केवल एक महीने के लिए लागू होगी। या फिर अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। यह नियम दिल्ली और पूरे एनसीआर क्षेत्र में लागू होगा। इसके अलावा जून 2022 के पुराने आदेश के बाकी सभी नियम पहले की तरह लागू रहेंगे। यानी पर्यावरण से जुड़े अन्य नियम नहीं बदले जाएंगे। यह बात भी साफ कर दी गई है।
प्रदूषण बोर्ड की क्या सलाह
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इस मामले में सलाह दी थी। 12 मार्च 2026 को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को एडवाइजरी भेजी गई थी। इसमें कहा गया था कि वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है। इसका उद्देश्य यह था कि उद्योगों का काम बंद न हो। अगर उत्पादन रुकता तो आर्थिक असर पड़ सकता था। इसलिए अस्थायी समाधान जरूरी समझा गया।
उद्योगों को मिली बड़ी राहत
इस फैसले से कई उद्योगों को राहत मिली है। कई होटल और रेस्टोरेंट भी इससे फायदा उठा सकेंगे। गैस की कमी के कारण कई जगह काम ठप होने का खतरा था। अब वे दूसरे ईंधन से काम जारी रख सकेंगे। इससे रोजगार पर भी असर कम पड़ेगा। और व्यापारिक गतिविधियां चलती रहेंगी। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ भी इसे राहत भरा कदम मान रहे हैं।
पर्यावरण के लिए अस्थायी उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अस्थायी कदम है। पर्यावरण के नजरिए से इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा। लेकिन मौजूदा हालात में यह जरूरी कदम बताया जा रहा है। इससे गैस की कमी से पैदा हुए संकट को संभाला जा सकेगा। साथ ही उद्योगों का काम भी चलता रहेगा। अगले आदेश तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। उसके बाद हालात देखकर आगे फैसला लिया जाएगा।

























