दिल्ली विधानसभा की जांच सामने आने के बाद सियासत में हलचल मच गई। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि वीडियो में कहीं भी ‘गुरु’ शब्द नहीं बोला गया। यही बात पहले पंजाब पुलिस की जांच में भी सामने आ चुकी थी। दोनों जांचों का निष्कर्ष एक जैसा रहा। इसके बावजूद इस मुद्दे को बड़ा विवाद बनाया गया। आम आदमी पार्टी का कहना है कि जानबूझकर भ्रम फैलाया गया। लोगों की भावनाओं से खेल किया गया। यह सामान्य राजनीति नहीं थी। इसे सोची-समझी साजिश बताया गया।
वीडियो में असल बात क्या
आम आदमी पार्टी के नेता Saurabh Bhardwaj ने कहा कि जांच का मकसद केवल एक था। यह देखना था कि वीडियो में ‘गुरु’ शब्द बोला गया या नहीं। रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा कुछ नहीं है। अगर कोई ध्यान से वीडियो सुने तो सच्चाई खुद सामने आ जाती है। एक बार नहीं बल्कि कई बार सुनने पर भी वह शब्द नहीं मिलता। इसके बावजूद आरोप लगाए गए। यही सबसे बड़ा सवाल है। झूठा दावा क्यों किया गया।
फोरेंसिक रिपोर्ट पर सवाल क्यों
आप नेताओं का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट के नाम पर आधा सच पेश किया गया। रिपोर्ट की भाषा को घुमा दिया गया। दिल्ली सरकार के दबाव की बात कही गई। लेकिन रिपोर्ट में भी ‘गुरु’ शब्द होने की पुष्टि नहीं हुई। सौरभ भारद्वाज ने चुनौती दी कि भाजपा रिपोर्ट को अदालत में रखे। अगर सच उनके साथ है तो डर क्यों। बयान बदलने से हकीकत नहीं बदलती। सवाल आज भी कायम है।
कपिल मिश्रा पर कार्रवाई क्यों नहीं
दो अलग-अलग जांचों के बाद भी भाजपा ने Kapil Mishra पर कोई कार्रवाई नहीं की। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि जानबूझकर फर्जी वीडियो फैलाया गया। गुरु की बेअदबी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। समाज को भड़काने की कोशिश की गई। आप ने मांग की कि कपिल मिश्रा को तुरंत पार्टी से हटाया जाए। अगर भाजपा सच में सच्चाई के साथ है। तो यह कदम जरूरी है। नहीं तो नीयत पर सवाल उठेंगे।
क्या सियासत से तनाव बढ़ाया जा रहा
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पहले हिंदू मुस्लिम विवाद खड़ा किया जाता था। अब हिंदू सिख समाज के बीच दूरी बनाने की कोशिश हो रही है। बिना जरूरत धार्मिक मुद्दे उठाए जा रहे हैं। राजनीति के लिए सामाजिक शांति को खतरे में डाला जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने इसे खतरनाक रुझान बताया। यह सब एक तय रणनीति का हिस्सा बताया गया। लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई। ताकि सच्चाई समझी जा सके।
स्पीकर की भूमिका पर सवाल क्यों
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा के स्पीकर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कहा गया कि स्पीकर को राजनीतिक बयानबाजी से दूर रहना चाहिए। उनका पद निष्पक्षता की मांग करता है। जब स्पीकर खुद विवाद में उतरता है। तो स्थिति और बिगड़ जाती है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इससे पद की गरिमा को ठेस पहुंचती है। लोकतंत्र में मर्यादा सबसे जरूरी होती है। इसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
अब आप की आगे की रणनीति
आम आदमी पार्टी ने ऐलान किया है कि वीडियो को हर मंच पर जनता तक पहुंचाया जाएगा। भाजपा के झूठ को उजागर किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि सच छिपाया नहीं जा सकता। दो जांच रिपोर्ट एक ही बात कह रही हैं। अब फैसला जनता को करना है। सियासत झूठ से नहीं चल सकती। लोकतंत्र सच पर टिका होता है। यही संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा।























