खुरालगढ़ साहिब की पवित्र धरती पर हुए राज्य स्तरीय समागम के दौरान संत समाज ने कहा कि इस बार के प्रबंध पहले से कहीं ज्यादा व्यवस्थित और मानवीय रहे। संगत के लिए रहने, लंगर और आवाजाही की पूरी व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा इंतजाम शांतिपूर्ण रहे। हर काम समय पर हुआ। किसी को कोई परेशानी नहीं आई। संतों ने कहा कि यह सब तभी संभव है जब सरकार की नीयत साफ हो। कार्यक्रम में दिखावा नहीं बल्कि सेवा भाव नजर आया। यही गुरु रविदास जी की असली सीख है।
संत निरमल दास जी ने क्या कहा?
संत निरमल दास जी जोड़े वालों ने कहा कि श्री गुरु रविदास महाराज जी ने खुरालगढ़ में चार साल से अधिक समय तक भक्ति की। इस भूमि को उन्होंने अपने तप से पावन बनाया। उन्होंने कहा कि आज उसी पवित्र स्थान पर सरकार द्वारा प्रकाश पर्व मनाया जाना गर्व की बात है। संत समाज की ओर से उन्होंने मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ते हैं। यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं है। यह समानता और इंसाफ का संदेश है। यही गुरु रविदास जी का मार्ग है।
डेरा बल्लां ने सरकार का धन्यवाद क्यों किया?
डेरा बल्लां से संत प्रदीप दास जी ने अपने संबोधन में कहा कि यह दिन ऐतिहासिक है। पहली बार मुख्यमंत्री पूरी कैबिनेट और सांसदों के साथ खुरालगढ़ पहुंचे। उन्होंने कहा कि डेरा बल्लां के पास गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र के लिए 10 एकड़ जमीन देना बड़ा फैसला है। इसके लिए वे सरकार के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों को गुरु रविदास जी की बाणी को समझने और पढ़ने का अवसर मिलेगा। यह फैसला लंबे समय तक असर दिखाएगा।
650वें प्रकाश पर्व को लेकर क्या योजना बनी?
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने 650वें प्रकाश पर्व को ध्यान में रखकर पूरे साल चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। इन कार्यक्रमों की शुरुआत आज से हो गई है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाओं को देश और दुनिया तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए कैबिनेट की एक सब कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। वे इसे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।
विरासत आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचेगी?
कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संभालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गुरु रविदास जी का संदेश आज भी समाज के लिए उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ घोषणाएं नहीं कर रही। जमीन पर काम करके दिखा रही है। यही वजह है कि लोगों का भरोसा बढ़ा है। संत समाज भी सरकार की सोच से संतुष्ट नजर आया।
धार्मिक रस्मों के दौरान क्या हुआ?
समागम से पहले मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट ने संगत के रूप में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग में भाग लिया। इसके बाद सरबत के भले के लिए अरदास की गई। सभी ने गुरु रविदास महाराज जी के तप-अस्थान पर माथा टेका। विधानसभा के डिप्टी स्पीकर जय किशन रोड़ी ने कहा कि यह पवित्र स्थान उनके विधानसभा क्षेत्र में है। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। पूरे वातावरण में शांति और श्रद्धा साफ महसूस की गई।























