नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के कार्यकाल को 14 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह जानकारी कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश के माध्यम से दी गई। विक्रम मिस्री, जो भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 1989 बैच के अधिकारी हैं, ने 15 जुलाई को विदेश सचिव का पदभार ग्रहण किया था। विक्रम मिस्री के कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा लिया गया है। इस समिति ने उनके सेवा अवधि को उनकी सेवानिवृत्ति तिथि, 30 नवंबर 2023, के बाद भी बढ़ाने को मंजूरी दी है।
यह विस्तार 14 जुलाई 2026 तक रहेगा या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो। इस विस्तार का प्रावधान एफआर 56 (डी) के अंतर्गत किया गया है, जो विदेश सचिव के सेवा में सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा में विस्तार की अनुमति देता है।
सार्वजनिक हित में लिया गया निर्णय
अधिकारियों के अनुसार, यह विस्तार सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर किया गया है। एफआर 56 (डी) के प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश नीति से संबंधित महत्वपूर्ण पदों पर अनुभवी अधिकारियों का मार्गदर्शन बना रहे। मिस्री की सेवा विस्तार से भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूती देने और कूटनीतिक मोर्चों पर उनके अनुभव का लाभ उठाने की योजना है।
विक्रम मिस्री का योगदान
विदेश सचिव के रूप में विक्रम मिस्री का कार्यकाल कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और भारत के विदेश नीति को दिशा देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। मिस्री की अगुवाई में भारत ने कई वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उनकी कुशलता और अनुभव का लाभ मिलता रहा है।
आगे की चुनौतियाँ और जिम्मेदारियां
विक्रम मिस्री का बढ़ा हुआ कार्यकाल भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नई चुनौतियों और अवसरों को लेकर आता है। आने वाले वर्षों में वैश्विक परिदृश्य में विभिन्न परिवर्तन होंगे, और भारत को अपने राजनयिक प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता होगी। मिस्री का यह अनुभव भारत को इन चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगा

























