मिडिल ईस्ट में हालात लगातार खराब हो रहे हैं।ईरान और इजरायल के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।इस तनाव ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है।ऐसे समय में भारत ने कूटनीतिक पहल तेज कर दी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बात की।यह बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं थी बल्कि गंभीर थी।दोनों नेताओं ने माना कि अगर जंग बढ़ी तो दुनिया को भारी नुकसान होगा।
क्या दुनिया को संदेश दिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया एक्स पर दी।उन्होंने लिखा कि मैक्रों से विस्तार से चर्चा हुई।दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात पर चिंता जताई।उन्होंने कहा कि हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं होता।दुनिया को बातचीत की राह पकड़नी चाहिए।युद्ध के बजाय संवाद जरूरी है।भारत और फ्रांस दोनों इस रास्ते को सही मानते हैं।
क्या बढ़ रही वैश्विक चिंता?
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने दुनिया को बेचैन कर दिया है।मिडिल ईस्ट का यह इलाका पहले ही संवेदनशील माना जाता है।अगर यहां जंग फैलती है तो असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।व्यापार पर भी असर पड़ेगा।यूरोप और एशिया दोनों प्रभावित होंगे।यही वजह है कि बड़ी ताकतें अब शांति की बात कर रही हैं।
क्या भारत निभा रहा भूमिका?
भारत इस संकट में सक्रिय भूमिका निभाता दिख रहा है।प्रधानमंत्री मोदी लगातार अलग-अलग देशों के नेताओं से बात कर रहे हैं।इसका मकसद साफ है।जंग को बढ़ने से रोकना।भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है।भारत का मानना है कि युद्ध किसी का भला नहीं करता।इसलिए कूटनीति को मजबूत करना जरूरी है।
क्या खाड़ी देशों से संवाद?
मैक्रों से बात करने से पहले मोदी ने खाड़ी देशों से भी संपर्क किया।उन्होंने बहरीन के शाह हम्माद बिन ईसा अल खलीफा से बात की।सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से भी चर्चा हुई।इन देशों पर हाल में मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं।भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा की।भारत ने साफ कहा कि क्षेत्र में शांति जरूरी है।
क्या संप्रभुता पर जोर?
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में एक और अहम बात कही।उन्होंने कहा कि हर देश की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए।यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल नियम है।अगर इसका उल्लंघन होगा तो अस्थिरता बढ़ेगी।हाल के हमलों ने यही चिंता बढ़ाई है।भारत ने स्पष्ट किया कि हिंसा स्वीकार नहीं है।समाधान सिर्फ शांतिपूर्ण रास्ते से ही निकल सकता है।
क्या संवाद से निकलेगा रास्ता?
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भी एक अहम सुझाव दिया।उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होनी चाहिए।काफी समय से यह संवाद बंद पड़ा है।अगर दोनों देश बात करेंगे तो तनाव कम हो सकता है।भारत और फ्रांस अब इसी दिशा में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।दुनिया को उम्मीद है कि बातचीत से रास्ता निकलेगा।
























