बढ़ते तनाव का असर भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की बड़ी मात्रा में LPG फंस गई है। सरकार के अनुसार करीब तीन लाख मीट्रिक टन गैस जहाजों में अटकी हुई है। यह गैस भारत के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है। क्योंकि देश की रसोई गैस का बड़ा हिस्सा आयात से आता है। हालात अचानक बिगड़ने के बाद कई जहाज आगे नहीं बढ़ पाए। इसी वजह से सप्लाई चेन पर भी चिंता बढ़ गई है।
क्या 22 भारतीय जहाज अटके
शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि इलाके में कुल 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं। अलग-अलग तरह के जहाज शामिल हैं। छह जहाज खास तौर पर LPG ले जाने वाले हैं। एक जहाज LNG का है और चार जहाज कच्चा तेल लेकर चल रहे हैं। बाकी जहाज अन्य कार्गो से जुड़े हैं। इन जहाजों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया गया है। हर जहाज के क्रू की स्थिति भी मॉनिटर की जा रही है।
क्या तीन लाख टन LPG अटकी
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि एक बड़े LPG कैरियर में करीब 45 हजार मीट्रिक टन गैस ले जाने की क्षमता होती है। इसी आधार पर अनुमान लगाया गया है कि छह जहाजों में कुल तीन लाख मीट्रिक टन LPG है। यह मात्रा भारत के लिए काफी अहम मानी जाती है। क्योंकि घरेलू गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। अगर सप्लाई देर से पहुंचती है तो असर बाजार पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। ऊर्जा मंत्रालय भी लगातार अपडेट ले रहा है।
क्या कुछ जहाज निकल पाए
इस बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। दो भारतीय LPG टैंकर सुरक्षित तरीके से होर्मुज पार कर चुके हैं। इन जहाजों के नाम शिवालिक और नंदा देवी बताए गए हैं। दोनों जहाज 14 मार्च को इस इलाके से निकल गए। इन पर कुल करीब 92 हजार 700 मीट्रिक टन LPG थी। इसके अलावा एक क्रूड ऑयल टैंकर भी सुरक्षित आगे बढ़ चुका है। यह जहाज यूएई के फुजैराह से भारत की तरफ रवाना हुआ है।
क्या जहाज बदलने की खबर सही
रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत और ईरान के बीच जहाजों की अदला-बदली की बात हो रही है। लेकिन सरकार ने इस दावे को साफ तौर पर गलत बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अफवाह है। सरकार की प्राथमिकता जहाजों की सुरक्षित आवाजाही है। इसलिए हर कदम सोच समझकर उठाया जा रहा है। इस मुद्दे पर अभी कोई अलग समझौता नहीं हुआ है।
क्या सरकार बना रही एग्जिट प्लान
सरकार ने माना कि होर्मुज इलाके में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। इसलिए जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। ईरान और अन्य देशों के साथ लगातार संपर्क रखा जा रहा है। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है। ताकि जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके। सरकार का कहना है कि जल्द ही हालात बेहतर होने की उम्मीद है।
क्या भारत की सबसे बड़ी चिंता
सरकार ने साफ किया कि सबसे बड़ी प्राथमिकता जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा है। हर जहाज में मौजूद भारतीय क्रू की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है। ऊर्जा सप्लाई पर असर न पड़े इसके लिए भी योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है। लेकिन भारत अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है।

























