भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता जल्द होने वाला है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि दोनों देश छोटे समझौते पर सहमत हो चुके हैं। बड़ा मुक्त व्यापार समझौता अभी थोड़ा दूर है। अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था से डील में समय लगता है। लेकिन यह खबर अच्छी है। इससे भारत के निर्यात बढ़ेंगे। किसानों को फायदा होगा क्योंकि चाय, कॉफी और मसालों पर शुल्क कम होगा। अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान सस्ता बिकेगा। मांग बढ़ेगी तो किसानों की कमाई बढ़ेगी। सरकार संतुलित व्यापार चाहती है। दोनों देशों को बराबर लाभ मिले। टैरिफ पर बात चल रही है। मुख्य मुद्दा सामान की श्रेणी है। जल्द सुलझ जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण भी कहता है कि इससे अनिश्चितता कम होगी। आम आदमी को सस्ते सामान मिलेंगे।
ट्रंप-मोदी की दोस्ती कैसे काम आएगी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त कहा है। दोनों नेता मिलकर डील को आगे बढ़ा रहे हैं। छह दौर की बातचीत हो चुकी है। ट्रंप ने कहा कि बेहतरीन डील होने वाली है। यह कूटनीति का कमाल है। वाणिज्य सचिव ने कहा कि ताली दोनों हाथों से बजती है। दोनों देशों का उत्साह जरूरी है। भारत की विकास दर 7 प्रतिशत है। वैश्विक संकट के बावजूद मजबूत है। निर्यात का लक्ष्य 850 अरब डॉलर है। डील से यह आसान होगा। किसान और कारोबारी खुश हैं। अमेरिका ने 200 से ज्यादा कृषि उत्पादों पर शुल्क कम किया। प्रोसेस्ड फूड को फायदा मिलेगा। मेवे और मसालों की बिक्री बढ़ेगी। इससे रोजगार बढ़ेंगे। अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
छोटी डील में क्या छिपा है?
छोटी डील अंतिम चरण में है। इसमें सहमत मुद्दों पर फोकस है। बड़ा एफटीए बाद में आएगा। लेकिन छोटी डील से ही बड़ा फायदा होगा। आयात शुल्क कम होंगे। भारतीय सामान अमेरिका में सस्ता बिकेगा। निर्यात बढ़ेगा। किसानों की उपज अच्छे दाम पर बिकेगी। सरकार संतुलन चाहती है। कोई एकतरफा फायदा नहीं। दोनों देशों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी। आर्थिक उथल-पुथल में यह राहत है। निर्यातकों के अच्छे दिन आएंगे। चाय और कॉफी उत्पादक खुश होंगे। मसाले और मेवे का कारोबार चमकेगा। आम आदमी को विदेशी सामान सस्ता मिलेगा। मुद्रास्फीति पर काबू होगा।
बड़ा एफटीए क्यों रुक रहा है?
बड़ा मुक्त व्यापार समझौता अभी दूर है। अमेरिका बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसमें समय लगता है। लेकिन छोटी डील से शुरुआत अच्छी है। टैरिफ पर मुख्य खींचतान है। सामान की श्रेणी सुलझानी है। वाणिज्य सचिव ने कोई तारीख नहीं बताई। लेकिन उम्मीद जताई कि जल्द होगा। भारत संतुलित नियम चाहता है। दोनों पक्षों को फायदा हो। कूटनीति चल रही है। ट्रंप और मोदी की दोस्ती मदद करेगी। छह दौर हो चुके हैं। आगे और बात होगी। इससे अनिश्चितता कम होगी। अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा। निर्यात बढ़ेंगे। किसानों को बाजार मिलेगा। कारोबारियों को मौका मिलेगा।
किसानों को कितना लाभ मिलेगा?
अमेरिका ने 200 कृषि उत्पादों पर शुल्क कम किया। चाय, कॉफी, मसाले शामिल हैं। मेवे और प्रोसेस्ड फूड को फायदा। अमेरिकी बाजार में सस्ता बिकेगा। मांग बढ़ेगी। किसानों की कमाई बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य निर्यात बढ़ाना है। 850 अरब डॉलर का टारगेट है। डील से आसान होगा। वैश्विक संकट में भी विकास दर मजबूत है। 7 प्रतिशत पर टिकी है। इससे रोजगार बढ़ेंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। आम आदमी को सस्ता सामान मिलेगा। मुद्रास्फीति काबू में रहेगी। कारोबार चमकेगा। भारत की वैश्विक छवि सुधरेगी।
अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
डील से बाहरी व्यापार मजबूत होगा। अनिश्चितता कम होगी। आर्थिक सर्वेक्षण कहता है कि फायदा होगा। विकास दर बनी रहेगी। निर्यात बढ़ेंगे। आयात संतुलित होगा। सरकार का जोर संतुलन पर है। कोई नुकसान नहीं। दोनों देशों को लाभ। कूटनीति सफल होगी। ट्रंप की तारीफ से साफ है। मोदी के साथ अच्छी केमिस्ट्री है। छोटी डील से शुरुआत होगी। बड़ा एफटीए बाद में। लेकिन प्रभाव अब से दिखेगा। किसान और कारोबारी तैयार रहें। अच्छे दिन आने वाले हैं। अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा। वैश्विक स्तर पर भारत मजबूत बनेगा।
डील कब तक पक्की होगी?
वाणिज्य सचिव ने कोई तारीख नहीं बताई। लेकिन अंतिम दौर में है। छोटी डील जल्द लगेगी। बड़ा एफटीए थोड़ा वक्त लेगा। बातचीत चल रही है। सहमति बन रही है। ट्रंप और मोदी की दोस्ती मदद करेगी। कूटनीति काम कर रही है। ताली दोनों हाथों से बजती है। उत्साह दोनों तरफ है। इससे फायदा होगा। निर्यातकों को बाजार मिलेगा। किसानों को दाम मिलेगा। आम आदमी को राहत मिलेगी। अर्थव्यवस्था चमकेगी। इंतजार खत्म होने वाला है। अच्छी खबर है। भारत मजबूत बनेगा।

























