संसद सिर्फ बहस की जगह नहीं, यह जनता के पैसे से चलती संस्था है। अनुमान बताते हैं कि संसद का एक मिनट करीब ढाई लाख रुपये का पड़ता है। एक घंटे का खर्च लगभग डेढ़ करोड़ रुपये बैठता है। पूरा दिन चले तो खर्च नौ करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। ऐसे में जब सदन ठप होता है तो पैसा फिर भी खर्च होता रहता है। बिजली, सुरक्षा और स्टाफ का वेतन बंद नहीं होता। नुकसान हर मिनट बढ़ता जाता है।
बजट सत्र में कितना समय बर्बाद हुआ?
28 जनवरी से शुरू हुए बजट सत्र में लोकसभा को 30 से 35 घंटे का समय मिला था। लेकिन हंगामे की वजह से 20 से 25 घंटे बेकार चले गए। इससे लोकसभा में ही करीब 30 से 35 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। राज्यसभा में भी हालात अलग नहीं रहे। वहां 12 से 15 घंटे का समय बर्बाद हुआ। इससे 18 से 22 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ। दोनों सदनों को जोड़ें तो आंकड़ा करीब 57 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
हंगामे की शुरुआत किस मुद्दे से हुई?
विवाद उस वक्त भड़का जब लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi को बोलने से रोका गया। वह पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े एक लेख का जिक्र करना चाहते थे। यह मामला 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़ा था। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। इसी के बाद सदन में शोर शुरू हो गया।
सदन में हंगामा कैसे बढ़ा?
राहुल गांधी को रोकने के बाद विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। सदस्य वेल में आ गए। तख्तियां और बैनर दिखाए गए। अगले दिन हालात और बिगड़ गए। कागज फेंके गए। अध्यक्ष की कुर्सी के सामने विरोध हुआ। सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। बहस पूरी तरह ठप हो गई। संसद का समय लगातार जाया होता रहा।
आठ सांसदों के निलंबन का क्या मतलब है?
लगातार अराजकता के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सख्त कदम उठाया। कांग्रेस के सात और सीपीआई-एम के एक सांसद सहित आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया। इनमें मनिक्कम टैगोर और हिबी ईडन जैसे नाम शामिल हैं। विपक्ष ने इसे दमन बताया। निलंबित सांसदों ने संसद परिसर में पोस्टर दिखाकर विरोध किया। इससे टकराव और गहरा गया।
क्या लोकतंत्र की कीमत चुकाई जा रही है?
इस पूरे घटनाक्रम ने लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अध्यक्ष ने बताया कि 19 घंटे से ज्यादा समय बर्बाद हो चुका है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बहस से भाग रही है। सरकार इसे अनुशासनहीनता बता रही है। बजट पर चर्चा और जरूरी मुद्दे प्रभावित हो रहे हैं। सत्र 13 फरवरी तक चलना है। अगर हंगामा जारी रहा तो नुकसान और बढ़ेगा। सवाल यह है कि इसकी कीमत आखिर कौन चुकाएगा।























