ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की मौत से पूरे मिडिल ईस्ट में हलचल मच गई है।यह घटना सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रही।दुनिया भर की राजनीति इस पर नजर रखे हुए है।खामनेई लगभग चार दशकों तक ईरान की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रहे।उनका प्रभाव सरकार से लेकर धार्मिक व्यवस्था तक था।इसी कारण उनकी मौत को बड़ी घटना माना जा रहा है।अब हर जगह इसके असर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
कांग्रेस ने क्यों जताया खुलकर शोक?
भारत में भी इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है।कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने खामनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया।इस प्रतिनिधिमंडल में सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा शामिल थे।उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक नेता की मौत नहीं है।यह ऐसा क्षण है जिसे दुनिया लंबे समय तक याद रखेगी।कांग्रेस की ओर से ईरान की जनता के नाम एक शोक संदेश भी तैयार किया गया।जिसमें खामनेई की भूमिका और योगदान का जिक्र किया गया।
पवन खेड़ा ने क्या दिया बड़ा बयान?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से दुनिया को सीख लेनी चाहिए।उन्होंने बताया कि यह घटना रमजान के पवित्र महीने में हुई।उस समय खामनेई रोजा रखे हुए थे।रमजान के दसवें रोजे के दिन यह हमला हुआ।खेड़ा ने कहा कि इस तरह की घटना इतिहास में लंबे समय तक याद की जाएगी।और इसका असर मिडिल ईस्ट की राजनीति पर भी पड़ेगा।
कैसे हुआ तेहरान में बड़ा हमला?
रिपोर्टों के अनुसार यह हमला 28 फरवरी को हुआ था।यह कार्रवाई तेहरान में की गई।कहा जा रहा है कि इसमें अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई थी।उस समय 86 वर्षीय खामनेई अपने आवासीय परिसर में मौजूद थे।हमले के दौरान उनके कार्यालय और आसपास के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया।इस घटना से पूरे ईरान में सनसनी फैल गई।और दुनिया भर में इसकी चर्चा होने लगी।
सरकारी मीडिया ने क्या की पुष्टि?
ईरान की सरकारी मीडिया ने 1 मार्च को खामनेई की मौत की पुष्टि की।सरकारी मीडिया ने उन्हें “शहीद” बताया।इस खबर के बाद पूरे देश में शोक का माहौल बन गया।सरकार ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया।कई शहरों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं।लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे।और अपने नेता को श्रद्धांजलि दी।
मौत के बाद क्यों बढ़ी उत्तराधिकारी की चर्चा?
खामनेई की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उत्तराधिकारी का है।ईरान में सुप्रीम लीडर का पद सबसे शक्तिशाली माना जाता है।इसलिए नए नेता की तलाश को लेकर चर्चा तेज हो गई है।कुछ रिपोर्टों में उनके बेटे का नाम भी सामने आ रहा है।हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।इसलिए दुनिया की नजर अब तेहरान पर टिकी हुई है।
क्या मिडिल ईस्ट में बढ़ेगा नया तनाव?
विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।मिडिल ईस्ट पहले से ही संवेदनशील क्षेत्र रहा है।ईरान और इजरायल के बीच टकराव पहले से जारी है।अमेरिका की भूमिका भी चर्चा में है।इस घटना के बाद कई देशों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।कुछ देशों ने शोक जताया है।जबकि कुछ इसे क्षेत्रीय राजनीति का बड़ा मोड़ मान रहे हैं।अब आगे क्या होगा इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

























