पाकिस्तान ईरान की मौजूदा स्थिरता को लेकर गंभीर चिंता में है।पिछले साल जून में जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की थी, उसी समय ईरान की स्थिति पहले से ही नाजुक थी।पाकिस्तानी अख़बार ट्रिब्यून के मुताबिक उस दौर में यह अटकलें थीं कि अमेरिका और इज़रायल ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए दबाव बना सकते हैं।
क्या अमेरिका-ईरान तनाव ने हालात और संवेदनशील बना दिए?
ट्रंप और आसिम मुनीर की मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद ईरान ने क़तर में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर प्रतीकात्मक हमला किया।इसके बावजूद अमेरिका ने कोई बड़ा सैन्य जवाब नहीं दिया।करीब 12 दिनों तक चले ईरान-इज़रायल टकराव के बाद भी ईरान की सरकार कायम रही।सूत्रों का कहना है कि आसिम मुनीर ने ट्रंप को ईरान की सरकार गिराने की कोशिश न करने की सलाह दी थी।
पाकिस्तान के लिए ईरान में सत्ता परिवर्तन खतरा क्यों है?
ट्रिब्यून के अनुसार पाकिस्तान ईरान में सत्ता परिवर्तन का विरोध करता है क्योंकि इसका सीधा असर उसकी आंतरिक सुरक्षा पर पड़ेगा।दोनों देशों के बीच लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा है।यह सीमा पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से होकर गुजरती है।किसी भी अस्थिरता से यह इलाका और ज्यादा संवेदनशील हो सकता है।
क्या बलूचिस्तान सबसे बड़ी चिंता का केंद्र है?
ईरान और पाकिस्तान के बलूच इलाकों में जातीय, जनजातीय और भाषाई समानताएं हैं।अगर ईरान में अराजकता फैलती है तो बलूचिस्तान में आतंकवाद बढ़ सकता है।हथियारों की तस्करी तेज हो सकती है।शरणार्थियों की आमद पाकिस्तान के लिए नया संकट खड़ा कर सकती है।ये सभी बातें पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
राजनयिक विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी ने कहा है कि ईरान में कोई भी आंतरिक या बाहरी बदलाव पाकिस्तान पर सीधा असर डालेगा।उन्होंने बताया कि पाकिस्तान पहले भी ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव कम करने में भूमिका निभा चुका है।इसी वजह से पाकिस्तान ईरान की स्थिरता को अपनी सुरक्षा से जोड़कर देखता है।
क्या पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर है?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में संकट की स्थिति बलूचिस्तान में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों को कमजोर कर सकती है।बलूचिस्तान के कई इलाकों में अभी भी अलगाववादी और सशस्त्र समूह सक्रिय हैं।इसलिए पाकिस्तान के लिए ईरान की स्थिरता सिर्फ पड़ोसी देश का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
आगे पाकिस्तान की रणनीति क्या हो सकती है?
पाकिस्तान ईरान में हो रही हर हलचल पर करीबी नजर बनाए हुए है।कूटनीतिक और सुरक्षा दोनों स्तरों पर सतर्कता बढ़ाई गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ईरान और पाकिस्तान के बीच सीमा सुरक्षा और साझा निगरानी सहयोग बेहद जरूरी रहेगा, ताकि बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में खतरे को नियंत्रित किया जा सके।

























