नई दिल्ली. झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले चरण की प्रचार अभियान सोमवार को समाप्त हो गया। इस चरण में 43 सीटों पर चुनाव होने हैं, जो राज्य की कुल 81 विधानसभा सीटों में से हैं। इन सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होगा। इस प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी जैसे उच्च-प्रोफाइल नेताओं ने अपनी पार्टी के गठबंधन, एनडीए और इंडिया ब्लॉक के लिए प्रचार किया।
चुनाव की कड़ी टक्कर
यह चुनाव बेहद कड़ी टक्कर का सामना करने वाला माना जा रहा है। एनडीए सरकार ने अपनी प्रचार रणनीति में घुसपैठ, भ्रष्टाचार और घोटालों पर जोर दिया है, जबकि इंडिया ब्लॉक आदिवासी अधिकारों, कल्याण और स्थानीय समुदायों के उत्पीड़न के मुद्दों पर बात कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने रांची में रोड शो किया, जबकि भाजपा शासित राज्यों के वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रचार में भाग लिया, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी शामिल थे।
हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी की रैलियां
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी और झामुमो विधायक कल्पना सोरेन के साथ सत्ताधारी गठबंधन के लिए रैलियों का नेतृत्व किया। हालांकि, हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी, जो एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है, चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। सत्ताधारी गठबंधन का दावा है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
चुनाव आयोग और हेलीकॉप्टर विवाद
झामुमो की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन ने सोमवार को चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह उनके प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर उड़ाने की अनुमति देने से इनकार कर रहा है। चुनाव आयोग ने हालांकि, इस आरोप को खारिज किया।
वोटर और उम्मीदवारों की संख्या
झारखंड के पहले चरण में 2.6 करोड़ मतदाताओं में से 1.37 करोड़ मतदाता वोट डालने योग्य हैं। इस चरण में 683 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 609 पुरुष, 73 महिलाएं और एक तृतीय लिंग उम्मीदवार हैं। 17 सीटें सामान्य हैं, जबकि 20 सीटें अनुसूचित जनजातियों और 6 सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं।
आगामी चुनाव और अन्य राज्यों की स्थिति
इसके अलावा, असम, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और कर्नाटका समेत विभिन्न राज्यों में उपचुनाव भी हो रहे हैं। इन चुनावों में राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंकी है, और जनता की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर है। विभिन्न मुद्दों पर प्रचार किया गया है, जैसे कि स्थानीय विकास, उम्मीदवारों का चयन और पार्टी के राजनीतिक दावे।
झारखंड समेत अन्य राज्यों में चल रहे उपचुनावों के परिणाम राजनीतिक दृष्टि से अहम होंगे। मतदाता 13 नवंबर को मतदान करेंगे और चुनाव का परिणाम 23 नवंबर को आएगा, जो आगामी राजनीतिक घटनाओं को प्रभावित कर सकता है।























