सोमवार को उन्नाव बलात्कार मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें सेंगर को जमानत दी गई थी। हाई कोर्ट ने अपील लंबित रहने तक आजीवन कारावास की सजा निलंबित की थी। इस आदेश को CBI ने चुनौती दी। अवकाशकालीन पीठ ने मामले की गंभीरता देखते हुए तत्काल स्टे दे दिया। अदालत ने साफ किया कि अगली सुनवाई तक हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
सुनवाई में आडवाणी केस कैसे आया?
सीबीआई की दलील के दौरान 1997 के ऐतिहासिक फैसले एलके आडवाणी बनाम सीबीआई का जिक्र हुआ। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सांसद और विधायक लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं। एजेंसी ने दलील दी कि यही सिद्धांत इस मामले में भी लागू होना चाहिए। आडवाणी केस का हवाला आते ही अदालत में बहस का दायरा बढ़ गया। सवाल यह उठा कि क्या जनप्रतिनिधियों के लिए कानून अलग-अलग तरीके से लागू हो सकता है। इसी आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी।
सीबीआई ने अदालत में क्या तर्क रखे?
सीबीआई ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अलग कानूनों में अलग दर्जा नहीं दिया जा सकता। अगर भ्रष्टाचार के मामलों में विधायक लोक सेवक माने जाते हैं, तो बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में उन्हें इससे बाहर रखना गलत होगा। एजेंसी ने कहा कि ऐसा करना POCSO Act की भावना को कमजोर करेगा। सीबीआई ने चेताया कि इससे गलत मिसाल बनेगी। उसका कहना था कि कानून की व्याख्या एकरूप होनी चाहिए। इसी आधार पर जमानत का विरोध किया गया।
हाई कोर्ट ने पहले जमानत क्यों दी थी?
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दी थी कि POCSO कानून में विधायकों को स्पष्ट रूप से लोक सेवक नहीं कहा गया है। इसी आधार पर सजा निलंबित की गई थी। हाई कोर्ट ने माना था कि कठोर प्रावधान सीधे लागू नहीं होते। इस आदेश से सेंगर को राहत मिली थी। लेकिन सीबीआई ने इसे कानून की गलत व्याख्या बताया। इसी कारण मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर तुरंत रोक लगा दी। अदालत ने सेंगर को नोटिस जारी किया है। उसे चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा गया है। तब तक सेंगर जेल में ही रहेगा। कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं की। कहा गया कि कानूनी सवाल गंभीर है और गहराई से सुनवाई जरूरी है। अगली तारीख बाद में तय की जाएगी।
सेंगर पर क्या आरोप हैं?
कुलदीप सिंह सेंगर को 2017 के उन्नाव मामले में दोषी ठहराया गया था। आरोप था कि उसने एक नाबालिग लड़की से बलात्कार किया। मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हुई। निचली अदालत ने सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में उसने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की। वहीं से उसे अस्थायी राहत मिली थी, जो अब रुक गई है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद सेंगर की जमानत फिलहाल रद्द मानी जाएगी। अब मामला इस सवाल पर टिक गया है कि क्या विधायक POCSO कानून के तहत लोक सेवक माने जाएंगे। इस फैसले का असर भविष्य के कई मामलों पर पड़ेगा। सीबीआई ने पुराने फैसलों के आधार पर मजबूत दलील दी है। बचाव पक्ष अपना जवाब दाखिल करेगा। अंतिम फैसला आने वाली सुनवाइयों में होगा।























