केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब दो बुकिंग के बीच का समय बढ़ा दिया गया है। पहले ग्राहक 21 दिन बाद नया सिलेंडर बुक कर सकते थे। अब यह अवधि बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है। इसका मतलब है कि ग्राहकों को अब पहले से ज्यादा इंतजार करना होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम कालाबाजारी रोकने के लिए उठाया गया है। इससे गैस की जमाखोरी पर भी रोक लगेगी।
क्या मिडिल ईस्ट तनाव बना वजह?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने दुनिया भर में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। फिर भी सरकार एहतियात के तौर पर कदम उठा रही है। ताकि आगे किसी तरह की दिक्कत न आए।
क्या पहले भी बढ़ाया गया था अंतर?
दरअसल सरकार पहले भी बुकिंग के बीच का समय बढ़ा चुकी है। पहले ग्राहक 15 दिन बाद सिलेंडर बुक कर सकते थे। बाद में इसे बढ़ाकर 21 दिन किया गया था। अब नया फैसला लेकर इसे 25 दिन कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम जमाखोरी रोकने के लिए जरूरी है। कई जगहों पर सिलेंडर जमा कर बेचने की शिकायतें मिलती रही हैं। इसलिए नियम सख्त किए गए हैं।
क्या सिलेंडर की कीमतें भी बढ़ीं?
इसी के साथ एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा हो गया है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 114.5 रुपये बढ़ी है। नई कीमत लागू होने के बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर अब 913 रुपये का हो गया है। पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी। इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
क्या बड़े शहरों में भी असर?
देश के बड़े शहरों में भी सिलेंडर की कीमत बढ़ी है। मुंबई में घरेलू सिलेंडर करीब 912.50 रुपये का हो गया है। कोलकाता में इसकी कीमत 939 रुपये पहुंच गई है। चेन्नई में यह लगभग 928.50 रुपये में मिल रहा है। कीमत बढ़ने से परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो सकता है। खासकर मध्यम वर्ग के लिए यह खर्च बढ़ने जैसा है।
क्या होटल और ढाबों पर असर?
कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से होटल और रेस्टोरेंट कारोबार भी प्रभावित होगा। 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर 114.5 रुपये महंगा हो गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अब 1,883 रुपये हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को भी इसकी कीमत बढ़ाई गई थी। उस समय 28 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। लगातार बढ़ती कीमतों से कारोबारियों की चिंता बढ़ रही है।
क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर?
सरकार का कहना है कि एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी प्रभावित होती हैं। कच्चे तेल की कीमत और सप्लाई की स्थिति के आधार पर फैसले लिए जाते हैं। पिछले एक साल में यह दूसरी बार है जब घरेलू सिलेंडर महंगा हुआ है। इससे पहले पिछले साल अप्रैल में भी कीमत बढ़ी थी। मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। आगे कीमतें बाजार की स्थिति पर निर्भर करेंगी।

























