नई दिल्ली केंद्र सरकार ने संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसे ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक के रूप में जाना जाता है। बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पर विचार-विमर्श के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति में शामिल किए जाने वाले सदस्यों के लिए सभी दलों से सिफारिशें मांगीं।
मंगलवार को लोकसभा में इस विधेयक को पेश करने के लिए वोटिंग हुई, जिसमें इसके पक्ष में 269 वोट पड़े। 198 सांसद इसके खिलाफ थे। इसे पेश किए जाने के तुरंत बाद सरकार ने इसे विचार-विमर्श और बदलाव के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की सिफारिश की।
विधेयक का सार लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना और एक महीने के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कराना है। सरकार का तर्क है कि इससे चुनाव प्रक्रिया सुचारू होगी, चुनाव लागत कम होगी और सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन की दक्षता बढ़ेगी।
दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने की नीति लागू करने से केवल सत्तारूढ़ दल को ही लाभ होगा और लोकतंत्र की मूल भावना को नुकसान पहुंचेगा। विपक्ष का यह भी तर्क है कि इससे लोकतंत्र की राष्ट्रपति प्रणाली लागू हो जाएगी और क्षेत्रीय दलों का महत्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

























