राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी का अंदाज इस बार अलग था।उन्होंने शायरी के जरिए विपक्ष को आईना दिखाया।उन्होंने कहा कि दुनिया को धोखा दिया जा सकता है।लेकिन अपनी सच्चाई नहीं छुपाई जा सकती।यह पंक्ति सुनते ही सदन में सन्नाटा छा गया।मोदी ने कहा कि विपक्ष अब उपदेश देने की स्थिति में नहीं है।उनकी पुरानी गलतियां आज भी सामने खड़ी हैं।यही वजह है कि सवाल उनसे पीछा नहीं छोड़ते।
कौन कौन निशाने पर था?
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और आम आदमी पार्टी पर एक साथ हमला बोला।उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद इन दलों ने जनता को कुछ नहीं दिया।विकास कभी उनकी प्राथमिकता नहीं रहा।सत्ता उनके लिए सिर्फ साधन थी।मोदी ने कहा कि देश अब सब देख रहा है।और जनता सच को पहचान चुकी है।इसी कारण विपक्ष बेचैन है।
टीएमसी पर इतना सख्त हमला क्यों?
मोदी ने तृणमूल कांग्रेस को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।उन्होंने कहा कि बंगाल में हालात चिंताजनक हैं।घुसपैठियों को बचाने की कोशिशें हो रही हैं।आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है।बेटियों की सुरक्षा खतरे में है।इसके बावजूद उपदेश दिए जाते हैं।मोदी ने पूछा कि नौजवान यह सब कैसे भूल सकते हैं।
आम आदमी पार्टी पर तंज कैसे?
बिना नाम लिए मोदी ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि एक पार्टी की सरकार शराब में डूबी हुई है।उन्हें ब्लैक शब्द से खास लगाव है।पता नहीं ब्लैक से उनका रिश्ता कितना पुराना है।प्रधानमंत्री ने कहा कि हर दल का अतीत होता है।लेकिन कुछ दलों के लिए वही पहचान बन जाता है।
विपक्ष की राजनीति किसलिए थी?
मोदी ने कहा कि विपक्षी दलों ने सत्ता को सेवा नहीं माना।उनके लिए सत्ता जेब भरने का जरिया रही।बोफोर्स जैसे घोटाले आज भी याद दिलाते हैं।जनता की जिंदगी बदलना उनकी सोच में नहीं था।प्रधानमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि देश ने उन्हें नकारा।अब राजनीति का पैमाना बदल चुका है।
बैंकिंग सिस्टम कैसे तबाह हुआ?
प्रधानमंत्री ने यूपीए दौर की बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि उस समय फोन बैंकिंग चलती थी।नेताओं के फोन पर करोड़ों रुपये बांटे जाते थे।गरीबों को बैंक से भगा दिया जाता था।जो पैसा लेकर भागे उन्हें संरक्षण मिला।2014 से पहले अर्थव्यवस्था की रीढ़ कमजोर हो चुकी थी।अब व्यवस्था सुधारी जा रही है।
भाषण का असली संदेश क्या?
मोदी का संदेश साफ था कि अब सिर्फ भाषणों का दौर खत्म हो चुका है।देश जवाब और नतीजे चाहता है।विपक्ष जितना भी शोर मचाए।उसे अपने अतीत से नजर नहीं चुरा सकता।राज्यसभा का यह भाषण सत्ता और विपक्ष की खाई को और गहरा करता है।लेकिन प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि वह सवालों से नहीं डरते।























