राज्य ने व्हाट्सएप-आधारित हेल्पलाइन 9501200200 शुरू की है। रिश्वत की मांग दर्ज की जा सकती है। नागरिक सीधे सरकार को सबूत भेज सकते हैं। हज़ारों शिकायतों पर कार्रवाई की गई है। कई अधिकारियों पर पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका है। सज़ा का डर बढ़ा है। जनता के लिए शिकायत दर्ज करना आसान हो गया है।
संपत्ति पंजीकरण प्रणाली में क्या परिवर्तन किए गए?
ई-रजिस्ट्री पोर्टल ने प्रक्रिया में उल्लेखनीय सुधार किया है। दो दिनों के भीतर पंजीकरण हो गए। ऑनलाइन डीड बनाने के लिए 500 रुपये का निश्चित शुल्क। आवेदकों को रीयल-टाइम अपडेट भेजे जाते हैं। कागजी कार्रवाई में देरी कम हुई है। अब बिचौलियों की ज़रूरत नहीं। अब राज्य भर में प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।
डिजिटल सेवाओं ने भूमि रिकॉर्ड की सुगमता में कैसे सुधार किया?
जमाबंदी पोर्टल पर ज़मीन के रिकॉर्ड उपलब्ध। घर बैठे डाउनलोड किए जा सकने वाले दस्तावेज़। प्रत्येक प्रति के लिए केवल ₹20 का शुल्क। पहले की तुलना में सत्यापन तेज़। नागरिकों को बार-बार दफ्तर जाने से बचना होगा। हेल्पलाइन के ज़रिए निगरानी बढ़ाई गई। राजस्व कार्यालयों में रिश्वतखोरी की घटनाओं में कमी आई।
सार्वजनिक सेवाएं नागरिकों के दरवाजे तक कैसे पहुंच रही हैं?
1076 नंबर के ज़रिए घर-घर डिलीवरी शुरू। घर बैठे प्रमाण पत्र जैसी सेवाएँ। कामकाजी लोगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपयोगी। इलाकों में हज़ारों शिविर लगाए गए। सेवा अधिकारी घर-घर जाकर लोगों से मिलते हैं। नागरिकों के समय की बचत। प्रशासनिक पहुँच आसान हुई।
सीएम विंडो शिकायत समाधान को कैसे गति प्रदान करता है?
सीएम विंडो 2024 के मध्य से सक्रिय। शिकायतों पर सीधे शीर्ष अधिकारियों द्वारा नज़र रखी जाएगी। डीसी और एसएसपी ज़िम्मेदार बने रहेंगे। कार्रवाई की समय-सीमाएँ स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। अधिकारियों पर कड़ी नज़र रखी जाएगी। नागरिकों को त्वरित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलेंगी। ज़िलों में जवाबदेही में सुधार हुआ है।
सतर्कता ब्यूरो ने प्रवर्तन को कैसे मजबूत किया है?
विजिलेंस ने अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है। विभागीय कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। कानूनी कार्यवाही में तेज़ी आई है। जाँच के बाद कई अधिकारी निलंबित किए गए हैं। सरकार का संदेश अभी भी सख़्त है। प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ी का डर बढ़ा है। विजिलेंस पूरे राज्य में औचक निरीक्षण जारी रखे हुए है।
शासन सुधारों से अब तक क्या परिणाम सामने आये हैं?
ई-टेंडरिंग ने ठेकों में मिलीभगत को कम किया। नशा-रोधी पुलिसिंग ने आंतरिक सफ़ाई सुनिश्चित की। पंजीकरण से राजस्व में वृद्धि दर्ज की गई। सरकार नए शिकायत ऐप पर काम कर रही है। निगरानी तकनीक का और विस्तार किया जाएगा। सभी विभागों में पारदर्शिता के स्तर में सुधार हुआ है। नागरिकों का व्यवस्था में बढ़ता विश्वास दिख रहा है।

























