पंजाब में नशा विरोधी कार्रवाई अब और तेज हो गई है। सरकार का दावा है कि तस्करों की कमर टूट रही है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अब माफिया के पास रास्ता कम बचा है। या तो वे राज्य छोड़कर भाग रहे हैं। या फिर जेल की सलाखों के पीछे भेजे जा रहे हैं। सरकार इसे अपनी सख्ती का नतीजा बता रही है। आम लोगों में भी इस अभियान की चर्चा है।
क्या गुरदासपुर की गिरफ्तारी ने हिला दिया?
गुरदासपुर के कलानौर में एक युवक को श्मशानघाट के अंदर नशा करते पकड़ा गया। पुलिस ने उसे मौके पर काबू किया। इस घटना ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। मंत्री चीमा ने दावा किया कि आरोपी के संबंध कांग्रेस से हैं। सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं। विपक्ष ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं। लेकिन मामला अब गांव-गांव में चर्चा का विषय बन गया है।
क्या सियासत में आरोपों की बरसात हो रही है?
नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है। हर सरकार ने दूसरी पर आरोप लगाए हैं। चीमा ने कहा कि पिछली सरकारों के समय नशे को रोका नहीं गया। उन्होंने अकाली-भाजपा और कांग्रेस दोनों को घेरा। उनका कहना है कि तस्करों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा। इसी कारण युवाओं का भविष्य बिगड़ा। अब मौजूदा सरकार सख्त रुख अपना रही है।
क्या सरकार की कार्रवाई सचमुच सख्त है?
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में अभियान चल रहा है। “युद्ध नशियों विरुद्ध” के नाम से यह मुहिम पूरे राज्य में फैली है। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार का कहना है कि सप्लाई चेन तोड़ी जा रही है। बड़े गिरोहों की संपत्ति जब्त की जा रही है। इससे माफिया में हलचल है।
क्या युवक सिर्फ अपराधी नहीं हैं?
सरकार का कहना है कि नशा करने वाला हर युवक अपराधी नहीं होता। कई बार वह हालात का शिकार होता है। इसलिए इलाज और पुनर्वास पर भी जोर दिया जा रहा है। नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है। डॉक्टरों की मदद से इलाज हो रहा है। परिवारों को भी समझाया जा रहा है। मकसद है कि युवक दोबारा सामान्य जीवन जी सके।
क्या जनता अब सरकार के साथ है?
चीमा का दावा है कि यह अभियान अब जन आंदोलन बन रहा है। गांवों में बैठकों का दौर चल रहा है। माता-पिता भी आगे आ रहे हैं। कई सामाजिक संगठन सहयोग दे रहे हैं। सरकार का कहना है कि जनता के साथ से ही जीत संभव है। लोगों की सोच में बदलाव दिख रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मुहिम अंतिम नतीजा देगी। रास्ता आसान नहीं है। नशे की जड़ें गहरी हैं। लेकिन सख्ती और इलाज दोनों साथ चल रहे हैं। राजनीति अपनी जगह है। पर मामला युवाओं के भविष्य का है। लोग चाहते हैं कि पंजाब फिर खुशहाल बने।
























