पंजाब के सरहदी इलाकों में खेती सिर्फ मेहनत नहीं बल्कि रोज़ की परीक्षा बन चुकी थी। खेत भारत के थे लेकिन फेंस के उस पार थे। किसान अपने ही खेतों में जाने से पहले पहचान पत्र दिखाते थे। बीएसएफ की इजाज़त के बिना एक कदम आगे नहीं बढ़ता था। कई बार घंटों इंतज़ार करना पड़ता था। पानी देने में देरी होती थी। दवा छिड़काव रुक जाता था। कटाई समय पर नहीं हो पाती थी। किसानों को लगता था कि सरहद के पास रहना अपराध बन गया है। यही व्यवस्था खेती को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही थी।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से क्या कहा
पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann ने यह मुद्दा सीधे दिल्ली में उठाया। उन्होंने गृह मंत्री Amit Shah से साफ शब्दों में कहा कि सुरक्षा जरूरी है लेकिन किसान की गरिमा उससे भी जरूरी है। मान ने बताया कि फेंस पंजाब के भीतर होने से लोग रोज़ अपमान झेलते हैं। उन्होंने मांग रखी कि फेंस को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास किया जाए। गृह मंत्री ने भरोसा दिया कि प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार चल रहा है। सुरक्षा से समझौता नहीं होगा। लेकिन किसानों को राहत मिलेगी।
यह समस्या कितनी बड़ी है
पंजाब की पाकिस्तान के साथ करीब 532 किलोमीटर लंबी सीमा है। कई जगहों पर बॉर्डर फेंस दो से तीन किलोमीटर भीतर बनी है। इससे हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन फेंस के बाहर रह गई। जमीन किसानों की है। लेकिन इस्तेमाल पूरा नहीं हो पा रहा। कई गांवों की पूरी अर्थव्यवस्था इन्हीं खेतों पर टिकी है। पाबंदियों ने उत्पादन घटा दिया। लागत बढ़ती चली गई। किसान हताश होता गया। अगर फेंस शिफ्ट होती है तो यही जमीन फिर से खुलेगी। बिना नई जमीन लिए खेती का दायरा बढ़ेगा।
फेंस हटने से क्या बदलेगा
फेंस शिफ्ट होने के बाद किसान बिना रोकटोक खेतों में जा सकेंगे। रोज़ की जांच खत्म होगी। हथियारबंद एस्कॉर्ट की जरूरत नहीं रहेगी। किसान अपने समय से खेती करेगा। फसल के हिसाब से काम होगा। सिंचाई समय पर होगी। छिड़काव नहीं रुकेगा। कटाई में देरी नहीं होगी। इससे पैदावार बढ़ेगी। नुकसान घटेगा। सबसे बड़ा बदलाव मानसिक होगा। किसान डर के बिना काम करेगा। खेती फिर से सामान्य जीवन का हिस्सा बनेगी।
क्या यह मॉडल पहले सफल रहा
मुख्यमंत्री ने बताया कि पठानकोट इलाके में ऐसा मॉडल पहले लागू हो चुका है। वहां सुरक्षा भी है और खेती भी चल रही है। इससे साबित हुआ कि दोनों साथ चल सकते हैं। मान ने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। वह खतरा नहीं है। सही प्रबंधन से सरहद सुरक्षित भी रह सकती है। और किसान भी परेशान नहीं होगा। इसी अनुभव के आधार पर अब पूरे बॉर्डर बेल्ट में बदलाव की उम्मीद जगी है। दूसरे जिलों के किसान भी इस फैसले की राह देख रहे हैं।
दिल्ली बैठक में और क्या उठा
दिल्ली में हुई बैठक में सिर्फ फेंस का मुद्दा नहीं उठा। मान ने सीड्स बिल 2025 पर पंजाब की आपत्ति रखी। एसवाईएल नहर विवाद को दोहराया। एफसीआई द्वारा अनाज उठान में देरी का सवाल उठाया। आढ़तियों की कमीशन और आरडीएफ भुगतान न होने की बात रखी। उन्होंने कहा कि इससे किसान और ग्रामीण ढांचा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। गृह मंत्री ने इन सभी मुद्दों पर विचार का भरोसा दिया। किसानों को उम्मीद है कि बात सिर्फ कागजों तक नहीं रुकेगी।
पंजाब के लिए इसका मतलब क्या
सरहदी किसानों के लिए फेंस शिफ्ट होना सिर्फ फैसला नहीं बल्कि सम्मान की वापसी है। यह अपने ही खेतों पर पूरा हक मिलने जैसा है। डर खत्म होगा। देरी खत्म होगी। रोज़ का अपमान खत्म होगा। अगर फैसला जमीन पर लागू हुआ तो आमदनी बढ़ेगी। भरोसा लौटेगा। यह संदेश जाएगा कि किसान की आवाज़ सुनी जा रही है। अब निगाहें अमल पर हैं। बरसों बाद सरहद पर खेती को उम्मीद की फसल दिख रही है।
























