पंजाब में कई गाँवों और कस्बों में पहले बस रूट बंद हो गए थे, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी होती थी। अब सरकार ने 3000 बंद रूट फिर चलाकर लोगों की राहत बढ़ा दी है। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, खेतों में काम करने वाले किसानों और नौकरी पर जाने वाले युवाओं को आसानी हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन रूटों को चलाने के लिए युवाओं को खुद बस खरीदकर चलाने का मौका दिया जा रहा है। इससे बेरोजगार युवा अब अपनी रोज़ी खुद बना रहे हैं। यह कदम लोगों में भरोसा और आत्मविश्वास बढ़ा रहा है। इसे लोगों ने सिर्फ़ योजना नहीं, बल्कि असली सहारा बताया है।
क्या इससे गांवों को राहत मिली?
गांवों में अक्सर अस्पताल, कॉलेज या बाज़ार दूर होते हैं, जिसकी वजह से आने-जाने में बहुत समय और पैसा खर्च होता था। नए बस रूटों से ग्रामीण इलाकों का शहरों से जुड़ाव बेहतर हो गया है। अब बुज़ुर्गों को इलाज के लिए मार्ग नहीं ढूंढना पड़ता, छात्रों को समय पर क्लास पहुंचने में आसानी है। महिलाओं के लिए भी यह सफ़र सुरक्षित और भरोसेमंद हुआ है। कम किराए में यात्रा होने से परिवार का खर्च भी कम हुआ है। यह कनेक्टिविटी सिर्फ़ सड़क नहीं जोड़ रही, बल्कि लोगों की ज़िंदगी से मुश्किलें हटा रही है।
युवाओं को रोज़गार कैसे मिल रहा है?
सरकार ने युवाओं को बस खरीदने के लिए सरल लोन व्यवस्था की है। बैंक में कागज़ी कार्रवाई भी कम रखी गई ताकि छोटी जगहों के युवा भी आसानी से आवेदन कर सकें। एक बस से एक नहीं तीन-चार लोगों को काम मिलता है—ड्राइवर, कंडक्टर, सफाई वाला और मेंटेनेंस से जुड़े लोग। इससे गाँव से लेकर कस्बों तक रोज़गार के नए दरवाज़े खुल रहे हैं। पहले लोग नौकरी ढूंढते थे, अब वे खुद काम देने वाले बन रहे हैं। यह बदलाव धीरे नहीं, दिखाई देने वाला है।
परमिट की क्या भूमिका है?
ट्रांसपोर्ट विभाग ने अभी तक 154 नए स्टेज कैरिज परमिट जारी किए हैं। परमिट मिलने से बस चलाना कानूनी और सुरक्षित होता है। इससे रूट तय होते हैं और किराया प्रणाली स्पष्ट होती है। जब नियम साफ़ हों, तो काम लंबे समय तक चलता है। सरकार का कहना है, “हम योजना नहीं, व्यवस्था खड़ी कर रहे हैं।” यह कदम भविष्य के लिए मजबूत नींव जैसा है।
आर्थिक असर कितना बड़ा है?
एक बस सिर्फ़ यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक चक्र का केंद्र बनती है। बस चलने से मैकेनिक का काम बढ़ता है, टायर दुकानों, डीज़ल पंपों और ढाबों का कारोबार भी बढ़ता है। जहाँ पहले चहल-पहल कम थी, वहां अब हर दिन नए लोग आते-जाते दिख रहे हैं। इससे छोटे बाज़ार भी सक्रिय हो रहे हैं। पैसे का प्रवाह बढ़ने से गांवों में नई उर्जा और रौनक लौट रही है। यह आर्थिक विकास का धरातल पर असर है।
सरकार की सोच क्या है?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं, बस सही मौका चाहिए। उन्होंने कहा कि “हम नौकरियां देने के साथ-साथ युवाओं को खुद का मालिक बनने का रास्ता दे रहे हैं।” ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने इस पहल को “रोज़गार नहीं, आत्मनिर्भरता का दरवाज़ा” कहा। सरकार का निशाना साफ है—पंजाब का भविष्य पंजाब का युवा तय करेगा।
क्या पंजाब मिसाल बन रहा है?
कई राज्यों में सार्वजनिक परिवहन कमजोर है, लेकिन पंजाब ने इस दिशा में तेज़ी से कदम उठाए हैं। ग्रामीण यात्रियों को घंटों इंतज़ार नहीं करना पड़ रहा। महिलाएं और बुज़ुर्ग अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। छात्रों के लिए स्कूल और कॉलेज की दूरी अब मुश्किल नहीं। यह बदलाव दिख रहा है, महसूस हो रहा है और लोगों की ज़िंदगी में आसानियां ला रहा है। पंजाब ने बता दिया है कि विकास सिर्फ़ घोषणाओं से नहीं, ज़मीन पर काम से होता है।























