चंडीगढ़ में हुई उच्च स्तरीय कानून व्यवस्था समीक्षा बैठक में भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब अब नशे के खिलाफ लंबी लड़ाई में साफ मोड़ देख रहा है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में पुलिस ने 85,418 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़ा पुराने दौर से बड़ा बदलाव दिखाता है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राजनीतिक दखल पूरी तरह खत्म किया गया है। अब कार्रवाई सिर्फ कानून के आधार पर होती है। पहले जहां घोषणाएं होती थीं, अब वहां जमीन पर कार्रवाई दिख रही है। यही फर्क इस अभियान को अलग बनाता है।
‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ कैसे बना गेम चेंजर?
मुख्यमंत्री ने 1 मार्च 2025 से शुरू की गई ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम को ऐतिहासिक बताया। इस अभियान के बाद 30,144 एफआईआर दर्ज हुईं और 40,302 तस्करों की गिरफ्तारी हुई। सरकार के सत्ता में आने के बाद कुल 63,053 नशा मामलों का पंजीकरण हुआ। मान ने कहा कि यह पंजाब की पहली लगातार और राज्यव्यापी एंटी ड्रग मुहिम है। इसके नतीजे अब साफ नजर आ रहे हैं। नशे की सप्लाई चेन को बड़ा झटका लगा है।
कार्रवाई की रणनीति कितनी मजबूत रही?
पंजाब सरकार ने तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति अपनाई। पहला सख्त कार्रवाई। दूसरा नशा मुक्ति। तीसरा रोकथाम। छोटे उपभोक्ताओं की बजाय बड़े सप्लायर और नेटवर्क निशाने पर रहे। 5,119 किलो हेरोइन, 3,458 किलो अफीम, 5.82 किलो कोकीन और 82 किलो आइस जब्त की गई। करीब 52.46 करोड़ रुपये की ड्रग मनी भी बरामद हुई। पूरा जोर नेटवर्क तोड़ने पर रहा। इससे तस्करी के ऊपरी ढांचे हिल गए।
वित्तीय कार्रवाई कैसे बनी सबसे बड़ा डर?
नशे के खिलाफ सबसे सख्त संदेश वित्तीय जांच से गया। 2022 से 2025 तक तस्करों से जुड़ी 2,730 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त की गई। 1,400 से अधिक अवैध संपत्तियों को फ्रीज करने के प्रस्ताव मंजूर हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे का पैसा अब अपराध को जिंदा नहीं रख पाएगा। जब कमाई पर चोट होती है, तो पूरा तंत्र कमजोर पड़ता है। यही वजह है कि तस्करों में डर साफ दिख रहा है।
क्या सजा दर सिस्टम में बदलाव दिखाती है?
एनडीपीएस एक्ट के तहत मजबूत जांच और प्रभावी पैरवी से सजा दर में बड़ा सुधार हुआ। 25,000 से ज्यादा मामलों का निपटारा हुआ। इनमें 21,600 से अधिक मामलों में दोष सिद्ध हुआ। कुल सजा दर करीब 84 प्रतिशत पहुंच चुकी है। सिर्फ 2025 में यह आंकड़ा लगभग 88 प्रतिशत रहा। मान ने फॉरेंसिक सपोर्ट और कानूनी फॉलोअप को इसका श्रेय दिया। तकनीक आधारित पुलिसिंग से केस मजबूत बने।
लोगों और तकनीक की क्या भूमिका रही?
जनता की भागीदारी इस अभियान की बड़ी ताकत बनी। SAFE पंजाब व्हाट्सऐप चैटबॉट से करीब 30,000 उपयोगी सूचनाएं मिलीं। इनसे 11,000 से ज्यादा एफआईआर और करीब 14,000 गिरफ्तारियां हुईं। कन्वर्जन रेट 38 प्रतिशत रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जनता के भरोसे का प्रमाण है। ड्रोन के जरिए तस्करी पर भी सख्त कार्रवाई हुई। 2025 में खास तौर पर सैकड़ों ड्रोन पकड़े गए।
क्या संगठित अपराध भी घेरे में है?
नशे के साथ-साथ संगठित अपराध पर भी शिकंजा कसा गया। 1 जनवरी से 17 दिसंबर 2025 तक पंजाब पुलिस ने 916 गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया। 13 खतरनाक अपराधियों को न्यूट्रलाइज किया गया। 389 गैंग मॉड्यूल तोड़े गए। 594 हथियार बरामद हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2025 अपराधियों के लिए हिसाब का साल रहा। आगे भी यह दबाव लगातार बना रहेगा।
























