चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि Gulab Chand Kataria द्वारा शुरू की गई एंटी-ड्रग यात्रा जमीन पर चल रही असली लड़ाई जैसी नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। यह लड़ाई भाषणों और तस्वीरों तक सीमित नहीं है। धालीवाल ने कहा कि समानांतर यात्राएं लोगों को भ्रमित करती हैं। पंजाब के लोग दिखावे और काम का फर्क समझते हैं। नशा कोई हल्का मुद्दा नहीं है। इस पर गंभीरता जरूरी है।
यात्रा में शामिल चेहरे सवाल क्यों खड़े कर रहे हैं?
धालीवाल ने कहा कि यात्रा में शामिल कुछ राजनीतिक चेहरे इसकी नीयत पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने खास तौर पर Sukhbir Singh Badal और भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इन्हीं नेताओं के शासनकाल में पंजाब में नशा फैला। ऐसे लोगों के साथ खड़े होकर नशा खत्म करने की बात करना भरोसेमंद नहीं लगता। धालीवाल ने कहा कि जब राजनीतिक संरक्षण मिलता है तो तस्कर बेखौफ हो जाते हैं। यहीं से जनता का भरोसा टूटता है।
क्या पंजाब 2007–2017 का दौर भूल सकता है?
आप नेता ने कहा कि पंजाब का दर्दनाक अतीत आज भी लोगों को याद है। 2007 से 2017 के बीच नशा खुलेआम फैला। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नशा तस्करों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। धालीवाल ने नशे को पंजाब की “छठी नदी” बताया। उन्होंने कहा कि हजारों परिवार तबाह हो गए। युवाओं का भविष्य अंधेरे में चला गया। कोई भी यात्रा उस सच्चाई को मिटा नहीं सकती। लोग सब कुछ याद रखते हैं। इतिहास को नकारा नहीं जा सकता।
युवाओं को क्या संदेश दिया जा रहा है?
धालीवाल ने कहा कि पंजाब के युवा सब कुछ बहुत ध्यान से देख रहे हैं। वे साफ और ईमानदार संदेश चाहते हैं। जब नशे से जुड़े रहे नेता एंटी-ड्रग यात्रा का चेहरा बनते हैं, तो संदेश गलत जाता है। यह नशा पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि ऐसा रवैया नैतिक रूप से खतरनाक है। युवाओं को सच्चाई और साहस चाहिए। दोहरे मापदंड नहीं।
नशे के खिलाफ AAP सरकार ने क्या किया है?
धालीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने नशे को सबसे बड़ी चुनौती माना है। Bhagwant Singh Mann और Arvind Kejriwal के नेतृत्व में लगातार कार्रवाई हो रही है। गिरफ्तारी, नेटवर्क तोड़ना और नशा मुक्ति अभियान एक साथ चल रहे हैं। यह लड़ाई रुकी नहीं है। इसके नतीजे जमीन पर दिख रहे हैं। सरकार नारे नहीं, काम में विश्वास करती है।
क्या गवर्नर को अलग रास्ता चुनना चाहिए था?
आप नेता ने कहा कि गवर्नर को उन लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए था जो सालों से नशे के खिलाफ ईमानदारी से लड़ रहे हैं। कई सामाजिक संगठन जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों से निष्पक्षता की उम्मीद होती है। विवादित राजनीतिक चेहरों के साथ खड़े होने से मुहिम कमजोर होती है। पंजाब को नैतिक नेतृत्व चाहिए था। यहां निराशा पैदा हुई।
क्या पंजाब ऐसी यात्रा का समर्थन करेगा?
अंत में धालीवाल ने कहा कि पंजाब के लोग सब समझते हैं। वे जानते हैं कि किसने नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ी और किसने तस्करों को संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता। नशा तस्करों के राजनीतिक संरक्षकों के साथ कोई भी यात्रा जनता का समर्थन नहीं पा सकती। आम आदमी पार्टी सरकार अपनी लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेगी। दिखावे से नशा कभी खत्म नहीं होगा।























