पंजाब न्यूज. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या अचानक नहीं आई. इसके पीछे सालों से कुछ ताकतवर लोगों की छतरी थी. युवाओं की जिंदगी बर्बाद होती रही और परिवार रोते रहे. लेकिन असली दोषियों पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई. मान ने कहा कि अब यह दौर खत्म होगा. चाहे कोई छोटा सप्लायर हो या बड़ा नेता, सब पर एक जैसा कानून लागू होगा. यह बयान पूरे पंजाब में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है.
‘चिट्टा’ नाम पर राजनीति क्यों?
कुछ नेताओं ने कहा कि उनके दौर में ‘चिट्टा’ शब्द सुना ही नहीं जाता था. मान ने जवाब में कहा कि नशा पहले भी था, बस नाम छुपाया गया था. उन्होंने कहा कि असल समस्या को शब्दों में छुपा दिया गया था. लोग पीते रहे, घर टूटते रहे, और सत्ता चुप रही. अब जब कार्रवाई हो रही है, तो वही लोग शोर मचा रहे हैं. समर्थकों का कहना है कि मान ने सच सामने रखा है. विरोधी इसे मंच की खबर बना कर प्रचार बता रहे हैं.
मजीठिया केस ने क्यों मचाई हलचल?
विजिलेंस ब्यूरो ने अकाली दल के बड़े नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को गिरफ्तार किया. उन पर करीब 540 करोड़ रुपये की काली कमाई को नशा कारोबार से जोड़ने का आरोप है. उनके ऊपर घोषित आय से 1200% ज़्यादा संपत्ति रखने का भी केस है. यह खबर आते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया. सरकार का कहना है कि कार्रवाई सबूतों पर आधारित है. विपक्ष कह रहा है कि यह बदले की राजनीति है. लोग अब इस केस की हर जानकारी पर नज़र रख रहे हैं.
जनता क्या सोच रही है?
कई परिवार जो नशे से टूट चुके थे, कह रहे हैं कि यह कदम सही समय पर आया. उनका कहना है कि पहले बड़े लोगों को हाथ नहीं लगाया जाता था. अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं. लेकिन कुछ लोग डर रहे हैं कि राजनीति और ज्यादा गंदी हो सकती है. गांव, शहर और सोशल मीडिया में यही मुद्दा गर्म है. जनता उम्मीद भी कर रही है और सावधान भी है. हर कोई अब नतीजे देखना चाहता है, सिर्फ बयान नहीं.
‘रंगला पंजाब’ हकीकत बनेगा?
मान सरकार कह रही है कि मकसद सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पंजाब को फिर से मजबूत बनाना है. नशा छुड़ाने वाले केंद्र बढ़ाए जा रहे हैं. नौजवानों के लिए खेल और रोजगार पर ध्यान दिया जा रहा है. सरकार कह रही है कि नशा बेचने वालों को कहीं छिपने की जगह नहीं मिलेगी. परिवारों को फिर से सामान्य जीवन दिया जाएगा. युवाओं को उनकी मंज़िल वापस मिलनी चाहिए. यह अभियान समाज की बहाली का प्रयास बताया जा रहा है.
विपक्ष क्यों नाराज़ है?
अकाली दल और कांग्रेस का आरोप है कि सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. उनका कहना है कि नशे की समस्या को एक व्यक्ति के सिर डालना गलत है. वे इसे ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहे हैं. मान ने कहा कि जिनके दिल में डर है, वही सबसे ज़्यादा बोलते हैं. टीवी बहसों में खूब टकराव देखा जा रहा है. यह विवाद अभी रुकने वाला नहीं है. मामला सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है.
पंजाब का कल किस पर तय होगा?
नशा सिर्फ एक बीमारी नहीं, समाज की जड़ को खोकला कर देता है. आने वाला समय युवाओं की सुरक्षा पर निर्भर करेगा. सरकार कह रही है कि यह अभियान नहीं रुकेगा. सामाजिक संगठन और लोग भी इसमें जुड़ रहे हैं. जनता की इच्छा है कि यह सिर्फ दिखावा न बने. असली सफलता तब होगी जब गांव-शहर में नशा खत्म होता दिखे. और युवाओं की आंखों में फिर से सपने चमकें.

























