इस साल कपास मंडियों में आते ही दाम नीचे चले गए और किसानों की परेशानी बढ़ने लगी क्योंकि व्यापारी केवल पांच हजार सात सौ से छह हजार आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल के बीच खरीद रहे थे जिससे किसान नुकसान महसूस कर रहे थे और कई किसान मजबूरी में बेच भी चुके थे तब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत हालात का जायजा लिया और टीम को दखल का आदेश दिया ताकि दाम MSP से नीचे न जाएं और किसानों की मेहनत बर्बाद न हो.
सरकार ने कैसे दखल दिया?
मान सरकार ने केंद्र की एजेंसी सीसीआई पर दबाव बढ़ाया कहा कि बड़े पैमाने पर खरीद शुरू की जाए और किसान नुकसान से बचें सीसीआई के आने से बाजार का माहौल बदला और निजी व्यापारी भी कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुए सरकार ने मंडी बोर्ड को दामों पर करीबी नजर रखने का आदेश दिया ताकि किसी को नुकसान न हो और खरीद में देरी न हो अब किसान राहत की सांस ले पा रहे हैं.
दाम में सुधार क्यों आया?
सीसीआई की खरीद शुरू होते ही नरमा कपास का औसत दाम साढ़े सात हजार से ऊपर पहुंच गया जो सात हजार सात सौ दस रुपये MSP के बेहद करीब है देसी कपास के दाम भी ऊपर गए किसान जो पहले कम दाम पर बेच रहे थे अब अपनी फसल का सही मूल्य पा रहे हैं यह सरकार की तेजी से कार्रवाई का असर है और किसान इसे बड़ी जीत मान रहे हैं.
आवक कम क्यों नहीं हुई?
इस साल भारी बारिश और बाढ़ के बावजूद कपास की आवक पिछले साल से एक लाख क्विंटल अधिक रही जो बताती है कि किसान अब भी कपास की खेती पर भरोसा रखते हैं सरकार की नीतियों से किसानों का मनोबल ऊंचा है खेती में नुकसान का डर कम हुआ है उत्पादन बना रहा है बाजार का माहौल सकारात्मक हो गया है यह बदलाव किसानों के विश्वास की जीत है.
CCI खरीद कितने पैमाने पर?
पिछले साल इसी समय सीसीआई ने केवल एक सौ सत्तर क्विंटल खरीदा था लेकिन इस साल सरकार के दबाव के बाद पैंतीस हजार तीन सौ अड़तालीस क्विंटल से ज्यादा खरीद हो चुकी है इससे दाम नीचे नहीं गिरे व्यापारियों पर भी असर पड़ा किसानों को मंडी में तुरंत पैसे मिले और फसल के दाम स्थिर बने रहे सरकार दावा कर रही है कि सहायता जारी रहेगी और हालात और मजबूत होंगे.
MSP से नीचे क्यों रुका संकट?
एक दिसंबर तक दो लाख तीस हजार चार सौ तेईस क्विंटल कपास बेची गई जिसमें शुरू में साठ प्रतिशत से ज्यादा MSP से नीचे बिकी लेकिन सीसीआई के एंट्री लेते ही यह ट्रेंड उलट गया अब किसान MSP के आसपास बेच पा रहे हैं दाम गिरने की आशंका खत्म हुई किसानों के हाथ में पैसा ज्यादा आया और नुकसान टल गया सरकार ने साफ बताया कि MSP से नीचे बेचने की नौबत नहीं आने देंगे.
किसानों को क्या संदेश मिला?
मान सरकार ने साबित किया कि संकट के समय वह किसानों के साथ खड़ी रहती है किसानों की कमाई बचाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना लक्ष्य है यह फैसला तेजी से लिया गया और उसका असर जमीन पर दिखा सरकार कहती है कि मेहनती किसान राज्य की रीढ़ हैं इसलिए उनकी फसल और मेहनत की कीमत हमेशा सुरक्षित रहेगी किसान इसे सम्मान और भरोसे की जीत बता रहे हैं अब उम्मीद है कि यह नीति आगे भी जारी रहेगी.























