मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने नागरिक सेवाओं के विस्तार का बड़ा ऐलान किया है। राज्य में 54 नए सेवा केंद्र खोले जाएंगे, जिससे कुल सेवा केंद्रों की संख्या 598 हो जाएगी। सरकार का दावा है कि पंजाब पहले ही देश में सबसे कम पेंडेंसी वाला राज्य बन चुका है। अब इस बढ़त को और मजबूत किया जाएगा। नए केंद्र शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खोले जाएंगे। इससे आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी।
सरकार इस पहल से क्या हासिल करना चाहती है?
इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं देना है। सरकार चाहती है कि हर आवेदन तय समय में निपटे। प्रशासनिक देरी को पूरी तरह खत्म किया जाए। डिजिटल सिस्टम को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाए। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी कम होगी। सरकार मानती है कि सेवा केंद्र प्रशासन और जनता के बीच सेतु हैं। इसलिए इनका विस्तार जरूरी है।
यह जानकारी किस बैठक में दी गई?
यह घोषणा एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में की गई, जिसकी अध्यक्षता गवर्नेंस रिफॉर्म्स और आईटी मंत्री Aman Arora ने की। बैठक चंडीगढ़ स्थित MAGSIPA में हुई। इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। बैठक का मकसद सेवा केंद्रों की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा करना था।
बैठक में और कौन-कौन मौजूद था?
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव D K Tiwari और GG&IT के निदेशक Vishesh Sarangal भी शामिल हुए। अधिकारियों ने जिला स्तर की रिपोर्ट पेश की। पेंडेंसी, आपत्तियों और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी जिलों से फीडबैक लिया गया। बेहतर प्रदर्शन वाले जिलों की पहचान की गई।
मौजूदा सेवा केंद्र कैसे काम कर रहे हैं?
फिलहाल पंजाब में 544 सेवा केंद्र काम कर रहे हैं। इनमें 263 शहरी और 281 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। ये केंद्र पूरी तरह आत्मनिर्भर बताए गए हैं। यहां 465 सरकारी सेवाएं और 7 बिजनेस टू सिटिजन सेवाएं दी जा रही हैं। बैठक में बताया गया कि ‘सेंड बैक’ मामलों में लगातार कमी आई है। इसका मतलब है कि बेवजह आपत्तियां अब कम लगाई जा रही हैं। इससे आम जनता को राहत मिली है।
जीरो पेंडेंसी को लेकर सरकार की क्या रणनीति है?
अमन अरोड़ा ने दो टूक कहा कि सरकार का लक्ष्य जीरो पेंडेंसी है। उन्होंने सभी डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिए कि सेवाएं तय समय में पूरी हों। सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया जाएगा। जीरो पेंडेंसी हासिल करने वाले अधिकारियों को भी पुरस्कार मिलेंगे। उन्होंने बताया कि ई-सेवा, एम-सेवा और व्हाट्सएप के जरिए ऑनलाइन वेरिफिकेशन को बढ़ावा दिया गया है। अब तक करीब चार लाख आवेदन आए हैं, जिनमें से 96.3 प्रतिशत निपटाए जा चुके हैं।
नए सेवा केंद्र कब तक बनकर तैयार होंगे?
आईटी मंत्री ने साफ निर्देश दिए कि नए सेवा केंद्रों का निर्माण 15 जनवरी 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। सरकार ‘Government at Your Doorstep’ योजना और Citizen Service Delivery Portal connect.punjab.gov.in के जरिए सेवाओं को और आसान बना रही है। उद्देश्य है कि नागरिकों को घर बैठे बेहतर अनुभव मिले। सरकार मानती है कि यही भविष्य की प्रशासनिक दिशा है। पंजाब मॉडल को अब दूसरे राज्य भी ध्यान से देख रहे हैं।

























