पंजाब में भगवंत मान सरकार ने परिवहन क्षेत्र से जुड़े हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। पटियाला में आयोजित दो दिवसीय स्वास्थ्य कैंप के जरिए बस चालक, ऑटो और टैक्सी कर्मियों को मुख्यमंत्री सेहत योजना में शामिल किया गया। इस पहल से अब इन कर्मचारियों और उनके परिवारों को सालाना 10 लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज सुविधा मिलेगी।
कैसे हुआ योजना का ऑन-द-स्पॉट लाभ?
1 और 2 अप्रैल को पीआरटीसी मुख्यालय में लगाए गए कैंप में मौके पर ही पंजीकरण की सुविधा दी गई। कर्मचारियों को तुरंत सेहत कार्ड जारी किए गए, जिससे उन्हें इलाज के लिए किसी लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
क्यों जरूरी था परिवहन कर्मियों को शामिल करना?
परिवहन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी लंबे समय तक सड़कों पर रहते हैं और अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। अनियमित आय और व्यस्त दिनचर्या के कारण इलाज में देरी होती है। अब इस योजना से उन्हें समय पर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना में परिवहन कर्मियों को शामिल करना एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी लगातार सफर में रहते हैं, इसलिए उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा देना बेहद जरूरी था, ताकि वे बिना चिंता इलाज करा सकें।
पीआरटीसी चेयरमैन का क्या बयान आया?
पीआरटीसी चेयरमैन हरपाल जुनेजा ने कहा कि परिवहन कर्मचारी पंजाब को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी सेहत का ध्यान रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इस कैंप के जरिए उन्हें बिना काम प्रभावित किए योजना से जोड़ा गया है।
योजना पर बढ़ता भरोसा क्या दर्शाता है?
आप नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस योजना पर बढ़ते भरोसे को दिखाती है। उन्होंने कहा कि अब लोग इस योजना का असर अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं, जिससे उनका विश्वास और मजबूत हो रहा है।
महिंदर सिंह की कहानी क्या बताती है?
कैंप के दौरान 63 वर्षीय दृष्टिबाधित पूर्व कर्मचारी महिंदर सिंह का पंजीकरण हुआ। यह उदाहरण दिखाता है कि योजना उन लोगों तक भी पहुंच रही है, जिन्हें सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।
योजना का विस्तार कितना बड़ा है?
मुख्यमंत्री सेहत योजना लगातार विस्तार कर रही है। अब तक पंजाब में 30 लाख से ज्यादा सेहत कार्ड जारी किए जा चुके हैं और रोजाना हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं। सरकार ने 2026-27 के बजट में इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है।
क्या यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाएगा?
यह पहल न केवल परिवहन कर्मियों के लिए राहत है, बल्कि यह राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे लोगों को समय पर इलाज और आर्थिक सुरक्षा दोनों मिलेंगी।

























