श्री आनंदपुर साहिब में 350वें शहीदी पर्व पर लाखों श्रद्धालु पहुंचे, जहां भगवंत सिंह मान सरकार ने यह साबित किया कि सरकार केवल प्रशासन नहीं, बल्कि जनसेवा का साधन भी होती है। धर्म और मानवता के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की स्मृति में प्रदेश सरकार ने सेवा और तत्परता को सर्वोपरि रखा। आपातकालीन स्वास्थ्य ढांचा पूरे दिन खुला रखा गया। भीड़ बढ़ने के बावजूद व्यवस्था शांत और अनुशासित रही। सरकार ने स्वास्थ्य को श्रद्धा से जोड़ा।
कैसे बनी आपात तैयारी?
श्री आनंदपुर साहिब, रोपड़ और कीरतपुर साहिब जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं संचालित रहीं। गंभीर मरीजों के लिए विशेष क्रिटिकल केयर यूनिट्स तैयार की गईं। तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना रुके सेवा की। मरीजों को समय पर दवाई, जांच और तत्काल उपचार दिया गया। यह व्यवस्था बताती है कि ‘स्वस्थ पंजाब’ मान सरकार के लिए केवल नारा नहीं, बल्कि धरातल पर लागू हकीकत है। हजारों श्रद्धालु इससे लाभान्वित हुए।
महिलाओं के लिए क्या खास?
सरकार ने संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाकर महिलाओं के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड की सुविधा उपलब्ध करवाई, साथ ही स्वच्छ निपटान के लिए डिस्पोज़र मशीनें लगाईं। माताओं के लिए अलग बेबी फीडिंग कक्ष बनाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने भीड़ के बावजूद साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा। इन सुविधाओं ने साबित किया कि श्रद्धालुओं की सुविधा सरकार की प्राथमिकता रही। प्रशासन इन इंतज़ामों को केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि सेवा के रूप में देख रहा था।
कैसे पहुंची चिकित्सा आमजन तक?
स्वास्थ्य विभाग ने पहले से संचालित 21 क्लीनिकों के अलावा 19 नए ‘आम आदमी क्लीनिक’ स्थापित किए। कुल 40 केंद्रों पर 24 घंटे ओपीडी और जांच सेवाएं दी गईं। 22 नवंबर तक ही 1,111 मरीजों की जांच हुई और 99 लैब टेस्ट बिल्कुल मुफ्त किए गए। इससे भीड़ में शामिल लोगों को तत्काल राहत मिली। डॉक्टरों ने किसी भी श्रद्धालु को इंतज़ार नहीं करने दिया। सेवा प्रणाली तेज, सटीक और समयबद्ध रही।
क्या है ‘निगाह लंगर’ पहल?
इस खास सेवा के तहत 522 व्यक्तियों की आंखों की जांच की गई और 390 श्रद्धालुओं को मुफ्त चश्मे दिए गए। रोपड़ ज़िला अस्पताल में एक मरीज़ की मोतियाबिंद सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इसे मानवता के प्रति एक कदम आगे माना जा रहा है। चिकित्सा को आध्यात्मिक सेवा से जोड़ते हुए प्रशासन ने दर्शाया कि यह आयोजन केवल स्मृति नहीं, बल्कि जीवन सुधार का अवसर भी था।
कितनी मजबूत रही एंबुलेंस प्रणाली?
किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए 24 बेसिक लाइफ सपोर्ट और 7 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस तैनात की गईं। हेल्पलाइन नंबर 98155-88342 लगातार सक्रिय रहा। चिकित्सा दल तुरंत मौके पर पहुंच सका। 25 नवंबर को विरासत-ए-खालसा तथा अन्य दिनों में पंज पियारा पार्क में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। सिस्टम ने यह दिखाया कि तैयारी केवल तात्कालिक नहीं, बल्कि भविष्य केंद्रित थी।
क्या यह मॉडल आगे अपनाया जाएगा?
मान सरकार ने दिखाया कि सत्ता सेवा का माध्यम है, उद्देश्य नहीं। इस आयोजन ने प्रमाणित किया कि सरकार जब इरादे से काम करे तो लाखों लोगों तक सही समय पर मदद पहुंचाई जा सकती है। श्रद्धालुओं ने इस प्रयास को ‘सेहत धर्म’ घोषित किया। आने वाले दिनों में ये सेवाएं जारी रहेंगी। यह मॉडल आने वाले राष्ट्रीय आयोजनों के लिए प्रेरणा बन सकता है।























