पंजाब सरकार ने खेती को नए नजरिए से देखने का फैसला किया। पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर बागबानी को प्राथमिकता दी गई। सरकार का साफ लक्ष्य किसानों की आमदनी बढ़ाना रहा। इसी नीति का असर जमीन पर दिखने लगा। बागबानी का रकबा लगातार बढ़ा। किसान नई तकनीक अपना रहे हैं। राज्य आज देश के अग्रणी बागबानी राज्यों में गिना जा रहा है।
सरकार की नीति में क्या है खास?
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में बागबानी को मिशन मोड में लिया गया। किसानों को सिर्फ सलाह नहीं दी गई। उन्हें आर्थिक मदद भी दी गई। फसली विविधता को बढ़ावा दिया गया। तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि खेती तभी टिकेगी जब किसान मुनाफे में रहेगा। यही सोच नीतियों की आधार बनी।
बागबानी मंत्री ने क्या दिशा दी?
बागबानी मंत्री मोहिंदर भगत के मार्गदर्शन में विभाग ने कई बड़े फैसले लिए। खेती से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया। किसानों को बाजार से जोड़ने पर काम हुआ। विभाग ने योजनाओं को जमीन तक पहुंचाया। इसका असर यह हुआ कि किसान बागबानी की ओर तेजी से बढ़े।
इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से किसानों को क्या मिला?
एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड योजना में बागबानी विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया। इस योजना के तहत अब तक 30 हजार से अधिक कृषि परियोजनाओं को करीब 7100 करोड़ रुपये का ऋण मिला। इससे कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट और पैकिंग सेंटर बने। किसानों और कृषि उद्यमियों को सीधा फायदा हुआ। खेती अब सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रही।
बागबानी का रकबा क्यों बढ़ा?
सरकारी प्रयासों से बागबानी क्षेत्र में भरोसा बढ़ा। पहले राज्य में करीब 4.81 लाख हेक्टेयर भूमि बागबानी के तहत थी। अब यह बढ़कर लगभग 5.21 लाख हेक्टेयर हो गई है। उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर किसान बढ़े। लुधियाना के लाढोवाल में अत्याधुनिक बागबानी विकास केंद्र बनाया जा रहा है। यह ज्ञान और प्रशिक्षण का केंद्र बनेगा।
‘अपणा पिंड-अपणा बाग’ से गांवों को क्या मिला?
इस अभियान के तहत गांवों की पंचायती जमीन पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इन बागों से होने वाली आय गांवों के विकास में खर्च होगी। इससे गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। रोजगार के नए मौके पैदा होंगे। बाग सिर्फ हरियाली नहीं बढ़ा रहे। गांव की आमदनी भी बढ़ा रहे हैं। यही इस योजना की असली ताकत है।
किसानों को कौन-कौन सी मदद मिल रही है?
नेशनल हॉर्टीकल्चर मिशन के तहत किसानों को 1575 लाख रुपये की सहायता दी गई। फूलों की खेती पर प्रति एकड़ 14 हजार रुपये की मदद मिल रही है। प्लास्टिक क्रेट और कार्टन बॉक्स पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। ड्रिप सिंचाई और नए बाग लगाने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन है। मशरूम उत्पादन और बाढ़ प्रभावित किसानों को भी राहत दी जा रही है। इन योजनाओं का साफ संदेश है। पंजाब में खेती अब बदलाव के दौर में है। बागबानी किसानों को मजबूत बना रही है। गांवों की तस्वीर बदल रही है।























