पिछले कुछ समय से तहरील दफ्तरों में जमीन रजिस्ट्री को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थीं। कहीं नकली गवाह बनाए गए। कहीं झूठी पहचान दिखाई गई। कई मामलों में तो मृत व्यक्ति के नाम पर भी रजिस्ट्री हो गई। इससे आम लोगों को भारी नुकसान हुआ। जमीन विवाद बढ़े। सरकार की छवि पर भी सवाल उठे। इन्हीं कारणों से Punjab Government ने नियमों को और कड़ा करने का फैसला लिया।
गवाहों के लिए अब क्या अनिवार्य हुआ?
नए नियमों के तहत अब कोई भी गवाह बिना आधार और OTP के गवाही नहीं दे सकेगा। चाहे वह नंबरदार हो। सरपंच हो। या कोई आम व्यक्ति। रजिस्ट्री के समय हर गवाह को अपना मोबाइल फोन साथ लाना होगा। मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना जरूरी है। मौके पर OTP आएगा। OTP सत्यापन के बाद ही रजिस्ट्री आगे बढ़ेगी। इससे फर्जी गवाहों पर पूरी तरह रोक लगेगी।
खरीददार और विक्रेता की पहचान कैसे होगी?
अब जमीन खरीदने और बेचने वाले दोनों की e-KYC अनिवार्य होगी। आधार आधारित बायोमेट्रिक जांच की जाएगी। उंगलियों के निशान लिए जाएंगे। साथ में OTP भी आएगा। आधार डाटा से पूरी जानकारी मिलाई जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे नकली पहचान के मामले खत्म हो जाएंगे। असली व्यक्ति ही जमीन खरीद या बेच सकेगा।
तहसील दफ्तरों में क्या नई व्यवस्था की गई?
हर तहसील और सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में बायोमेट्रिक मशीनें लगाई जाएंगी। पहले यह सुविधा हर जगह मौजूद नहीं थी। अब रजिस्ट्री के समय तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि हर रजिस्ट्री नए नियमों के अनुसार ही की जाए। किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
क्या इससे जमीन घोटाले सच में रुकेंगे?
सरकार का मानना है कि आधार लिंक e-KYC से बड़ा बदलाव आएगा। मृत व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री संभव नहीं होगी। फर्जी कागजों से जमीन ट्रांसफर नहीं हो पाएगा। गलत गवाह बनाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। जमीन रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ेगी। आम लोगों का भरोसा मजबूत होगा। यही इस फैसले का मुख्य उद्देश्य है।
विदेश में रहने वालों के लिए क्या नियम बने?
अगर जमीन मालिक या खरीददार विदेश में रहता है। या खरीददार नाबालिग है। और उसकी तरफ से कोई और रजिस्ट्री करवा रहा है। तब भी आधार और मोबाइल OTP से पहचान जरूरी होगी। बिना डिजिटल सत्यापन कोई रजिस्ट्री नहीं होगी। सरकार का कहना है कि इससे सही व्यक्ति के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

























