पंजाब में भगवंत मान की अगुवाई में “शानदार 4 साल, भगवंत मान के साथ” अभियान शुरू किया गया। इस दौरान मंत्री और विधायक सीधे लोगों के घर पहुंचे। उन्होंने योजनाओं की जानकारी दी और लोगों से फीडबैक लिया। इस पहल से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सरकार जनता के बीच मौजूद है और उनकी समस्याएं सुन रही है।
क्या गांव से शहर तक पहुंच बनी?
यह अभियान सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहा। गांवों और वार्डों तक भी टीमों ने पहुंच बनाई। बर्नाला, मानसा, बठिंडा, लुधियाना और जालंधर जैसे जिलों में बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। नुक्कड़ सभाओं और जनसंवाद के जरिए लोगों से सीधा संपर्क किया गया। हर जगह लोगों की भागीदारी ने इस अभियान को और प्रभावी बना दिया।
मंत्रियों के दावे क्या हैं?
कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल ने कहा कि सरकार ने जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव किए हैं। योजनाओं का लाभ हर घर तक पहुंचाया गया है। वहीं हरभजन सिंह ईटीओ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली के क्षेत्र में सुधार को बड़ी उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि इससे आम लोगों की जिंदगी बेहतर हुई है।
क्या यह सिर्फ प्रचार है?
मंत्री लाल चंद कटारूचक ने इस अभियान को सिर्फ प्रचार नहीं बल्कि जनता से जुड़ने का जरिया बताया। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की जरूरतों को समझना चाहती है और उनके प्रति जवाबदेह रहना चाहती है। यह पहल सरकार और जनता के बीच भरोसा मजबूत करने की कोशिश है।
लोगों की प्रतिक्रिया कैसी रही?
कई जगहों पर लोगों ने सरकार के कामों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिजली, स्कूल और सेवाओं में सुधार साफ नजर आता है। कुछ स्थानों पर लोगों ने खुलकर समर्थन भी जताया। इससे सरकार को सकारात्मक संकेत मिले हैं कि जनता का एक वर्ग उसके काम से संतुष्ट है।
क्या 2027 की तैयारी शुरू हो गई?
इस अभियान को आने वाले चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। कई जगहों पर लोगों ने दोबारा समर्थन देने की बात कही। मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर भरोसा जताया गया। साफ है कि यह सिर्फ रिपोर्ट कार्ड नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है।
आगे क्या असर पड़ेगा?
यह अभियान आने वाले समय में बड़ा असर डाल सकता है। सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाने के साथ-साथ जनता से जुड़ाव भी बढ़ा रही है। विपक्षी दल भी इस पर नजर बनाए हुए हैं। अब देखना होगा कि यह मुहिम चुनावी नतीजों पर कितना प्रभाव डालती है। पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

























