आम आदमी पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने कहा कि रवनीत बिट्टू के शब्द सामान्य बयान नहीं हैं।ये उस सच्चाई की कबूलियत हैं जिसे पंजाब सालों से झेलता आया है।बादलों से गठजोड़ का मतलब वही दौर है।जब नशा हर गली तक पहुंचा था।जब गैंगस्टर खुलेआम घूमते थे।जब कानून डर के साये में था।बिट्टू ने अनजाने में पूरा सच बोल दिया।
क्या अकाली भाजपा शासन ने नशा फैलाया था?
पन्नू ने कहा कि 2007 से 2017 तक का समय पंजाब का सबसे अंधेरा दौर था।इस दौरान चिट्टे ने युवाओं को तबाह कर दिया।गैंगस्टर संस्कृति मजबूत हुई।पुलिस पर हमले हुए।नाभा जेल टूटी।बेटियां असुरक्षित हुईं।यह सब अकाली भाजपा शासन की पहचान बन गया।पंजाब आज भी उस दर्द को नहीं भूला।
कांग्रेस के पांच सालों में चुप्पी क्यों रही?
पन्नू ने सवाल उठाया कि 2017 से 2022 तक कांग्रेस सरकार रही।तब बिट्टू की आवाज क्यों नहीं निकली।क्या नशा खत्म हो गया था।क्या किसी बड़े माफिया को सजा मिली।सच यह है कि कुछ नहीं हुआ।वादे किए गए।कसम खाई गई।लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदला।आज का बयान उस चुप्पी की गवाही है।
भाजपा नेता बादलों से हाथ क्यों मिलाना चाहते हैं?
पन्नू ने कहा कि आज भाजपा के कुछ नेता खुले तौर पर बादलों से गठजोड़ की वकालत कर रहे हैं।वे कहते हैं कि बिना बादलों के राजनीति संभव नहीं।क्या यह सत्ता की भूख है।या पुराने साथियों से मोह।क्या उन्हें नशे की तबाही याद नहीं।या सब जानकर भी आंखें मूंद ली गई हैं।पंजाब इन सवालों के जवाब चाहता है।
आप सरकार के बाद क्या बदला है?
2022 के बाद पंजाब में साफ बदलाव दिख रहा है।नशे के खिलाफ युद्ध छेड़ा गया।गैंगस्टरों पर लगातार कार्रवाई हुई।कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं।पुलिस को खुली छूट मिली।कानून मजबूत हुआ।लोगों का भरोसा लौटा।यह बदलाव कागजों में नहीं बल्कि जमीन पर दिख रहा है।पंजाब पहली बार राहत महसूस कर रहा है।
क्या पुरानी मिलीभगत की राजनीति खत्म हुई?
पन्नू ने कहा कि अकाली कांग्रेस भाजपा की मिलीभगत अब सामने आ चुकी है।सालों तक एक-दूसरे को बचाया गया।नशा माफिया को हाथ नहीं लगाया गया।आप सरकार ने इस चक्र को तोड़ा है।ईमानदार शासन दिया है।कानून सबके लिए बराबर है।अब पंजाब पुरानी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा।
क्या पंजाब फिर अंधेरे दौर में जाएगा?
आम आदमी पार्टी ने कहा कि पंजाब के लोग अब जागरूक हैं।वे सब देख चुके हैं।वे दोबारा उस दौर में नहीं लौटना चाहते।बिट्टू का बयान एक चेतावनी है।पुरानी ताकतें वापसी चाहती हैं।लेकिन जनता तैयार नहीं।पंजाब अपना भविष्य खुद बचाएगा।























