ृसुखबीर सिंह बादल के एक बयान ने पूरा माहौल बदल दिया। उन्होंने अकाल तख़्त के फैसले पर सवाल उठाया। यह बयान आते ही चर्चा तेज हो गई। राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई। कई लोगों ने इसे गंभीर माना। सवाल उठने लगे कि क्या यह सही था। अब यह विवाद सियासत से आगे बढ़ गया है।
क्यों भड़की सियासत इतनी?
विपक्षी दलों ने तुरंत हमला बोला। आम आदमी पार्टी के नेता मालविंदर सिंह कंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह बयान निराशा दिखाता है। यह सिख परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने इसे गलत बताया। कंग ने साफ कहा कि पवित्र संस्थाओं पर सवाल ठीक नहीं। इस बयान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया।
क्या पहले माफी मांग चुके थे?
कंग ने पुरानी बात भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि पहले बादल ने गलती मानी थी। वह अकाल तख़्त साहिब में पेश हुए थे। वहां उन्होंने अपनी भूल कबूल की थी। यह सब लाइव देखा गया था। लोगों को वह दृश्य याद है। लेकिन अब बयान बदल गया है। यही बात विवाद को और बढ़ा रही है।
क्या दोहरी राजनीति दिख रही?
कंग ने सवाल उठाया कि रुख क्यों बदला। पहले गलती मानना और अब सवाल उठाना। यह लोगों को समझ नहीं आ रहा। उन्होंने इसे दोहरा रवैया बताया। कहा कि यह अहंकार दिखाता है। इससे सिख समाज आहत होता है। लोगों के मन में शंका बढ़ रही है। यही वजह है कि बहस तेज हो रही है।
साजिश वाली बात पर क्या?
बादल ने कहा था कि उनके खिलाफ साजिश हो रही है। इस पर भी जवाब आया। कंग ने इसे गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि यह इतिहास के खिलाफ है। ऐसे शब्द ठीक नहीं हैं। इससे माहौल खराब होता है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार नेता को सोचकर बोलना चाहिए। यह बयान और विवाद बढ़ा गया।
क्या क़ौम इसे मानेगी?
अब बड़ा सवाल यही है। क्या सिख समाज इसे स्वीकार करेगा। कंग ने कहा कि ऐसा संभव नहीं लगता। उन्होंने इसे बड़ी गलती बताया। अकाल तख्त के फैसले पर सवाल गंभीर बात है। इससे संस्था की साख जुड़ी है।

























