होशियारपुर के सरकारी स्कूलों में आयोजित मेगा पेरेंट्स-टीचर मीटिंग ने एक नई सोच को जन्म दिया है। अभिभावकों और शिक्षकों के बीच हुई खुली बातचीत ने शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई सामने रख दी है। अब सरकारी स्कूल सिर्फ ढांचे में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई के स्तर में भी तेजी से सुधार कर रहे हैं। इस बदलाव ने लोगों का भरोसा मजबूत किया है। अब माता-पिता अपने बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों को बेहतर विकल्प मानने लगे हैं।
पिछले चार सालों में बड़ा बदलाव
स्कूल के प्रिंसिपल सुरजीत सिंह ने बताया कि यह स्कूल 1956 में स्थापित हुआ था और लंबे समय से शिक्षा दे रहा है। लेकिन पिछले चार वर्षों में यहां बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। सबसे खास बात यह है कि बड़ी संख्या में बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर यहां दाखिला लिया है। यह लगातार बढ़ता रुझान सरकारी नीतियों और शिक्षकों की मेहनत का नतीजा है। इससे शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है।
विदेशों से भी मिली सराहना
मेगा PTM में शामिल एक अभिभावक, जो विदेश से आए थे, उन्होंने सरकारी स्कूलों की तरक्की की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी सुविधाओं की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आज जब वह पंजाब के स्कूलों की प्रगति देखते हैं तो गर्व महसूस होता है। उनका मानना है कि शिक्षा में सुधार ही राज्य के विकास की असली कुंजी है। यह बात बदलती शिक्षा व्यवस्था को दर्शाती है।
अब प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ रही भागीदारी
शिक्षकों के अनुसार अब सरकारी स्कूलों के छात्र भी JEE और NEET जैसी कठिन परीक्षाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। यह पढ़ाई के स्तर में आए सुधार का स्पष्ट संकेत है। पहले इन परीक्षाओं में निजी स्कूलों का दबदबा माना जाता था, लेकिन अब सरकारी स्कूल भी इस दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं। इससे अभिभावकों का विश्वास और मजबूत हुआ है।
अभिभावकों की खुशी आई सामने
एक महिला अभिभावक ने अपनी बेटी की प्रगति रिपोर्ट देखकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अब उन्हें बच्चे की पढ़ाई और कमजोरियों के बारे में पूरी जानकारी मिल रही है। पहले ऐसा मौका नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि अगर पहले यह व्यवस्था होती तो बच्चे और आगे बढ़ सकते थे। यह मेगा PTM अभिभावकों और शिक्षकों के बीच मजबूत रिश्ता बना रही है।
क्या बदल रही है शिक्षा की तस्वीर?
यह मेगा PTM सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि शिक्षा में बदलाव का संकेत है। सरकारी स्कूलों को लेकर समाज की सोच तेजी से बदल रही है। अब लोग इन्हें भी एक मजबूत विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। आने वाले समय में यह बदलाव और बड़ा रूप ले सकता है। शिक्षा का यह नया मॉडल समाज के लिए उम्मीद की किरण बन रहा है।
























