भगवंत मान सरकार ने यह कदम छोटे और मझोले व्यापारियों को ध्यान में रखकर उठाया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार कारोबार मजबूत करना चाहती है। प्रक्रियाएं सरल की जाएंगी। प्रशासन जवाबदेह होगा। बाजार में भरोसा बढ़ेगा। सरकार सहयोगी की भूमिका निभाएगी।
क्या ‘पिलर टू पोस्ट’ भागना रुकेगा?
चीमा ने कहा कि छोटे व्यापारी मामूली काम के लिए भी कई दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होता है। अब एक प्लेटफॉर्म पर मंजूरी मिलेगी। अलग-अलग विभागों के पास नहीं जाना पड़ेगा। रोजमर्रा का काम आसान होगा। भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी।
क्या शिकायतों का समयबद्ध समाधान होगा?
कमीशन एक समर्पित मंच होगा। यहां व्यापारियों की शिकायतें सुनी जाएंगी। तय समय में समाधान दिया जाएगा। फाइलें लंबित नहीं रहेंगी। हर आवेदन की निगरानी होगी। देरी पर अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा। पारदर्शी प्रणाली लागू होगी।
क्या जिलों में तैयारी शुरू है?
दस जिलों में बैठकें हो चुकी हैं। फरीदकोट, लुधियाना, पटियाला समेत कई जिले शामिल हैं। स्थानीय व्यापारियों से सुझाव लिए गए। रोडमैप तैयार किया गया। जिला स्तर पर टीमों को जिम्मेदारी दी गई। समयसीमा तय की गई।
क्या ईमानदार व्यापारियों को मिलेगा सहारा?
मंत्री ने कहा कि व्यापारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा। लाइसेंस और पंजीकरण प्रक्रिया आसान होगी। नियमों की स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। सरकार समर्थन देगी।
क्या कारोबार का माहौल सुधरेगा?
चीमा ने कहा कि कमीशन सेवा और पारदर्शिता पर आधारित होगा। लक्ष्य है ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाना। निवेश को बढ़ावा मिलेगा। नए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा। पंजाब को व्यापार के लिए बेहतर राज्य बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
























