बरनाला की अनाज मंडी में बड़ी भीड़ जुटी।मंच पर राहुल गांधी पहुंचे तो नारे लगे।कांग्रेस ने यहीं से अभियान शुरू किया।यह सिर्फ सभा नहीं थी।यह चुनावी इशारा था।मालवा से आवाज उठी।2027 की तैयारी साफ दिखी।
क्या एकता पर सख्त संदेश?
राहुल ने कहा पार्टी सबसे बड़ी है।कोई अकेला नेता जीत नहीं दिला सकता।टीम बनकर ही सफलता मिलती है।जो एकजुट नहीं रहेगा वह पीछे रहेगा।यह साफ चेतावनी थी।अनुशासन पर जोर दिया गया।संदेश सीधा था।
क्या कार्यकर्ताओं को सम्मान?
राहुल ने कार्यकर्ताओं को ताकत बताया।जमीनी मेहनत को अहम कहा।ऊपर से आदेश से बात नहीं बनती।सम्मान देना जरूरी है।मिलकर लड़ना होगा।एकजुट रहना होगा।भीड़ ने तालियां बजाईं।
क्या मालवा रणनीति का केंद्र?
मालवा को पंजाब की राजनीति का दिल कहा जाता है।बरनाला अहम इलाका है।मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत मान भी इसी क्षेत्र से हैं।पहले प्रकाश सिंह बादल भी यहीं से रहे।इसलिए कांग्रेस ने यहां से शुरुआत की।यह सोच समझकर उठाया कदम था।
क्या किसान मुद्दे उठे?
मनरेगा संशोधन बिल का जिक्र हुआ।किसानों की बात की गई।केंद्र सरकार पर सवाल उठे।ट्रेड डील पर भी चर्चा हुई।मजदूरों की आवाज उठाई गई।कांग्रेस ने संघर्ष का भरोसा दिया।लोगों ने समर्थन जताया।
क्या सभी नेता साथ दिखे?
मंच पर कई बड़े नेता मौजूद थे।राजा वड़िंग पहुंचे।चरणजीत चन्नी भी आए।प्रताप बाजवा और सुखजिंदर रंधावा नजर आए।अन्य वरिष्ठ नेता भी साथ खड़े थे।एकता की तस्वीर दिखी।संदेश स्पष्ट था पार्टी साथ है।
क्या 2027 की जंग शुरू?
इस रैली को चुनावी बिगुल माना जा रहा है।कांग्रेस खुलकर मैदान में आ गई है।एकता पर जोर बढ़ा है।मालवा में पकड़ मजबूत करने की कोशिश है।आने वाले समय में और सभाएं होंगी।अन्य दल भी सक्रिय हैं।पंजाब की राजनीति गरम होने लगी है।
























