शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने शिरोमणि कमेटी के अधिकार क्षेत्र में पंजाब सरकार की तरफ से की जा रही दखलअंदाजी की कड़ी निंदा की और कहा कि सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के मुताबिक, शिरोमणि कमेटी को किसी भी लापरवाही के लिए कर्मचारियों के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन लेने का अधिकार है और सिख संस्था के हेड होने के नाते, वह सरकार की तरफ से किसी भी तरह की दखलअंदाजी नहीं होने देंगे।
चंडीगढ़ में शिरोमणि कमेटी के सब-ऑफिस में रिपोर्टर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सिख संस्था का मुख्य सेवक होने के नाते, इसकी परंपराओं और अधिकारों की रक्षा करना उनका कर्तव्य है और पंजाब सरकार को इसमें बिल्कुल भी राजनीतिक दखलअंदाजी नहीं करने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सिख गुरुद्वारा एक्ट की धारा 142 के मुताबिक, सिख गुरुद्वारा ज्यूडिशियल कमिश्नर शिरोमणि कमेटी के मामलों के लिए एक्टिव हैं। किसी भी कर्मचारी की एडमिनिस्ट्रेटिव लापरवाही की सुनवाई का यह इंतज़ाम हर तरह से पूरा है, जिसका उल्लंघन करके पंजाब सरकार कानून और एक्ट की भावना का उल्लंघन कर रही है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि एक तरफ तो सरकार ने कोर्ट में एफिडेविट देकर शिरोमणि कमेटी के अधिकारों को माना है, लेकिन दूसरी तरफ FIR दर्ज करके राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि डॉ. ईशर सिंह ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में पुलिस से इंसाफ की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी साफ लिखा है कि कोई भी पॉलिटिकल पार्टी इस मामले पर राजनीति न करे, अगर कोई ऐसा करता है तो यह श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश का उल्लंघन होगा।
उन्होंने कहा कि सरकारी पक्ष यह प्रचार कर रहा है कि शिरोमणि कमेटी सहयोग नहीं कर रही है, जबकि शिरोमणि कमेटी पहले ही श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के अनुसार दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर चुकी है। उन्होंने कहा कि माननीय कोर्ट ने भी कर्मचारियों द्वारा इसके खिलाफ कोर्ट में की गई अपील को खारिज कर दिया है और शिरोमणि कमेटी के फैसले को सही माना है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी के 105 साल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि सरकार ने उसके दिए गए एफिडेविट के खिलाफ एक्शन लिया हो। उन्होंने कहा कि AAP सरकार ने पहले भी विधानसभा में सिख संस्था को चुनौती देने की कोशिश की थी और अब भी राजनीतिक हमले करके संगत को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने संगत को चेतावनी दी कि सिख ताकत को कमजोर करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी साजिशें कामयाब होती हैं तो न सिर्फ गुरुद्वारा एक्ट का उल्लंघन होगा, बल्कि मैनेजमेंट में सरकार का सीधा दखल होगा, जो पंथ के हित में नहीं है।























