नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में गुरुवार रात एक यात्री ट्रेन से टकराकर एक मोटा लकड़ी का टुकड़ा पटरी पर फंस गया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। इस घटना को एक संभावित तोड़फोड़ के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह घटना उस समय हुई है जब एक महीने पहले कानपुर के प्रेमपुर रेलवे स्टेशन के पास एक खाली गैस सिलेंडर रेलवे ट्रैक पर मिला था और मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में सेना के जवानों से भरी ट्रेन को उड़ाने की कोशिश में 10 डेटोनेटर भी पाए गए थे।
ट्रेन कुछ दूर तक घसीटती रही
घटना में ट्रेन संख्या 14236 बरेली-वाराणसी एक्सप्रेस, जो दिल्ली और लखनऊ के बीच चल रही थी, एक लकड़ी के मोटे टुकड़े से टकरा गई। यह टुकड़ा लगभग 2 फीट लंबा और 10 किलोग्राम से अधिक वजन का था, जिसे ट्रेन कुछ दूर तक घसीटती रही। यह लकड़ी ट्रेन के धातु के पहियों में फंस गई थी, लेकिन चालक, जिसे लोको पायलट कहा जाता है, ने समय रहते ट्रेन को सुरक्षित रोक लिया।
इस घटना से सिग्नलिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचा, जिससे लखनऊ-हरदोई अप और डाउन लाइन पर रेल यातायात प्रभावित हुआ। इसके बाद अन्य ट्रेनों के लोको पायलटों को सतर्क होकर ट्रेन चलाने की चेतावनी दी गई।
RPF के कर्मी भी मौके पर पहुंचे
निकटतम रेलवे स्टेशन ने स्टेशन मास्टर्स को अलर्ट किया और मामले की जांच के लिए एक निरीक्षण टीम भेजी। निरीक्षण दल और लोको पायलट ने बड़ी मुश्किल से लकड़ी के टुकड़े को हटाया। इस प्रक्रिया में रेल यातायात दो घंटे तक बाधित रहा। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कर्मी भी मौके पर पहुंचे और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने लकड़ी के टुकड़े को हटाने में मदद की।
हाल के दिनों में रेलवे पटरियों पर तोड़फोड़ के प्रयासों को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है और इन मामलों की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
लोको पायलट की सतर्कता प्रंशसनीय
सितंबर में मध्य प्रदेश के सगफाटा रेलवे स्टेशन के पास सेना की विशेष ट्रेन को निशाना बनाकर डेटोनेटर लगाए गए थे। हालांकि, लोको पायलट की सतर्कता के चलते ट्रेन को समय रहते रोक लिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि रेलवे प्रशासन संभावित तोड़फोड़ के खतरों को लेकर सतर्क है और एनआईए तथा विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

























